“अमृत सरोवर या कमीशन सरोवर?”
हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। कसडोल जनपद पंचायत में इन दिनों कथित तौर पर कमीशनखोरी का अलग ही खेल चल रहा है। मामला जिला खनिज न्यास (DMF) मद से वर्ष 2025-26 में स्वीकृत 19.99 लाख रुपए की लागत से बनाए जा रहे अमृत सरोवर निर्माण कार्य से जुड़ा है। आरोप है कि ग्राम पंचायतों की जानकारी और अनुमति के बिना ही ठेकेदारों से काम कराया जा रहा है, जबकि कार्य एजेंसी स्वयं ग्राम पंचायत है।

जानकारी के अनुसार, बलौदाबाजार जिले के कसडोल जनपद पंचायत अंतर्गत 23 ग्राम पंचायतों में जल संचयन के उद्देश्य से नवीन तालाबों को अमृत सरोवर के रूप में विकसित किया जा रहा है। नियमानुसार यह कार्य ग्राम पंचायत के माध्यम से होना था, लेकिन सरपंचों का आरोप है कि जनपद स्तर से सीधे ठेकेदारों को काम सौंप दिया गया।

“हमें ठेकेदार का नाम तक नहीं पता” – सरपंच
कुछ ग्राम पंचायतों के सरपंचों का कहना है कि उन्हें न तो ठेकेदार का नाम पता है, न पता और न ही मोबाइल नंबर। उनका आरोप है कि जनपद पंचायत के सीईओ कमलेश साहू द्वारा दबाव बनाकर कहा जा रहा है कि “जब कहा जाए, तब चेक काटकर ठेकेदार को दे देना।”
सरपंचों का यह भी दावा है कि उन्हें 5% कमीशन देने की बात कही जा रही है। सवाल उठता है कि जब कार्य एजेंसी स्वयं ग्राम पंचायत है, तो फिर ठेकेदारों के माध्यम से काम क्यों कराया जा रहा है?
नियमों के विपरीत काम का आरोप
नियमों के अनुसार ग्राम पंचायत के विकास कार्यों को पंचायत स्तर पर ही संपादित किया जाना चाहिए। लेकिन आरोप है कि अमृत सरोवर निर्माण का ठेका कथित मिलीभगत से बाहर के ठेकेदारों को दे दिया गया। इससे पंचायत की स्वायत्तता और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

गुणवत्ताहीन निर्माण की शिकायत
ग्राम पंचायत कोसमसरा में 19.99 लाख रुपए की लागत से बने अमृत सरोवर को लेकर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखा गया। पत्थरों के ऊपर सीमेंट का मसाला डाला गया, लेकिन नीचे उचित आधार नहीं बनाया गया।
परिणामस्वरूप, मात्र एक महीने के भीतर ही संरचना में दरारें और टूट-फूट दिखाई देने लगी है। यदि तकनीकी जांच होती है तो बड़े स्तर पर अनियमितता सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

उठ रहे बड़े सवाल
जब कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत है, तो ठेका जनपद स्तर से क्यों?
सरपंचों को ठेकेदार की जानकारी क्यों नहीं?
5% कमीशन की बात कितनी सही?
निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी कौन कर रहा है?
एडीओ से सीईओ तक का मामला भी चर्चा में
सूत्रों के अनुसार जनपद पंचायत कसडोल में पदस्थ मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) कमलेश साहू का मूल पद एडीओ (सहायक विकास अधिकारी) बताया जा रहा है। आरोप है कि लंबे समय से वे सीईओ का पदभार संभाले हुए हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि उच्च स्तर तक पहुंच के कारण वे वर्षों से इस पद पर बने हुए हैं। अब आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि सीईओ पद का दुरुपयोग करते हुए ग्राम पंचायतों के कार्य ठेकेदारों से कराए जा रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में आधिकारिक पुष्टि या विभागीय प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
अब सरपंच दबी जुबान से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता,या अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
इस मामले में जब कसडोल जनपद पंचायत के सीईओ कमलेश साहू से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि “जो छपना है, छाप दो”, और मामले पर विस्तृत जानकारी देने से बचते नजर आए।
इनका कहना
मुझे इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है, जानकारी लेकर आपको बताती हूं।
दिव्या अग्रवाल , सीईओ, जिला पंचायत बलौदाबाजार











