हेमंत बघेल
कसडोल। जनपद पंचायत में इन दिनों अमृत सरोवर निर्माण कार्य को लेकर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। वर्ष 2025-26 में जनपद के 23 ग्राम पंचायतों में करीब 4 करोड़ 60 लाख रुपये की लागत से अमृत सरोवर निर्माण कार्य कराया जा रहा है। यह योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल अमृत सरोवर योजना के तहत संचालित है, जिसका उद्देश्य स्वतंत्रता के 75वें वर्ष पर प्रत्येक जिले में कम से कम 75 जल निकायों का निर्माण या पुनर्जीवन कर जल सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

लेकिन कसडोल में इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि जनपद पंचायत के सीईओ कमलेश साहू द्वारा ग्राम पंचायतों के कार्यों को नियमों के विपरीत ठेकेदारों के माध्यम से कराया जा रहा है, जबकि निर्माण एजेंसी के रूप में ग्राम पंचायत का नाम साइन बोर्ड पर स्पष्ट रूप से अंकित है।

5% कमीशन का आरोप, पहली किस्त 8 लाख जारी
सूत्रों और कुछ सरपंचों से मिली जानकारी के अनुसार अमृत सरोवर निर्माण कार्य में 5 प्रतिशत तक कमीशन तय किया गया है। बताया जा रहा है कि सीईओ के निर्देश पर पहली किस्त के रूप में लगभग 8 लाख रुपये बिना ठेकेदारों की विधिवत जानकारी और प्रक्रिया पूरी किए ही जारी कर दिए गए।

सरपंचों का कहना है कि भविष्य में कार्य प्रभावित होने के डर से वे खुलकर विरोध नहीं कर पा रहे हैं। दबी जुबान में कई जनप्रतिनिधि सीईओ के स्थानांतरण की चर्चा जरूर कर रहे हैं, लेकिन आधिकारिक शिकायत करने से बच रहे हैं।
गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
जिन पंचायतों में अमृत सरोवर का निर्माण हुआ है, वहां ग्रामीणों ने गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं। करीब 19.99 लाख रुपये की लागत से बने कुछ सरोवरों में कुछ ही महीनों में दरारें और टूट-फूट दिखाई देने लगी है। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और पारदर्शिता दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
सूची देने में भी टालमटोल
जब पत्रकारों द्वारा अमृत सरोवर से संबंधित ग्राम पंचायतों की सूची मांगी गई तो जनपद के कर्मचारियों ने बिना सीईओ की अनुमति जानकारी देने से इंकार कर दिया। हालांकि 23 ग्राम पंचायतों में कार्य होने की पुष्टि की गई।
कलेक्टर से जांच की मांग
जिले के तत्कालीन कलेक्टर दीपक सोनी ने स्पष्ट कहा था कि ग्राम पंचायत के कार्य सरपंच और सचिव के माध्यम से ही कराए जाने चाहिए। वहीं जिला पंचायत सीईओ दिव्या अग्रवाल को भी मामले की जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई लिखित जांच आदेश सामने नहीं आया है।

अब जिले के नए कलेक्टर कुलदीप शर्मा से ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों को निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की उम्मीद है।
केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना में यदि वाकई कमीशनखोरी और नियमों की अनदेखी हुई है तो यह न केवल प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल है, बल्कि जल संरक्षण जैसे गंभीर विषय के साथ भी अन्याय है। अब देखना होगा कि प्रशासन कब तक इस मामले में ठोस कदम उठाता है।











