हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। कसडोल विकासखंड के देवरुंग स्कूल में शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रकाशित खबर का असर अब साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। मामले को गंभीरता से लेते हुए विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) अरविंद ध्रुव ने शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय देवरुंग के प्रधानपाठक राधेश्याम पटेल को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। नोटिस में तीन दिवस के भीतर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।

जारी नोटिस क्रमांक वि०ख०शि०अ०/का०ब०सू०/2026/2537, दिनांक 23.03.2026 में बीईओ ने उल्लेख किया है कि 22 मार्च को प्रकाशित खबर में स्कूल की गंभीर लापरवाही उजागर हुई है। खबर में बताया गया था कि स्कूल समय में छात्र-छात्राओं को गांव में चल रही भागवत कथा में भेज दिया गया, जो कि शिक्षा व्यवस्था के प्रति घोर लापरवाही दर्शाता है। साथ ही यह भी सामने आया कि स्कूल के शिक्षक एवं प्रभारी प्रधानपाठक अक्सर अनुपस्थित रहते हैं।

नोटिस में प्रधानपाठक से स्पष्ट रूप से पूछा गया है कि स्कूल समय में बच्चों को अन्यत्र क्यों भेजा गया और उस दौरान शिक्षक क्या कर रहे थे। साथ ही आरोपों के संबंध में साक्ष्य सहित लिखित स्पष्टीकरण देने के लिए तीन दिन का समय दिया गया है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उच्च कार्यालय को प्रकरण भेजने की चेतावनी भी दी गई है।
गौरतलब है कि देवरुंग के शासकीय पूर्व माध्यमिक एवं प्राथमिक विद्यालय में कुल 15 छात्रों पर 4 शिक्षक पदस्थ हैं, जो कि शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के निर्धारित अनुपात के विपरीत है। जहां एक ओर कई स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहीं इतने कम बच्चों वाले स्कूल में अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले की पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया था कि 13 मार्च को जब पत्रकार स्कूल पहुंचे, तब वहां एक भी छात्र मौजूद नहीं था और शिक्षक भी अनुपस्थित मिले। पूछताछ करने पर प्रधानपाठक द्वारा पत्रकारों से दुर्व्यवहार करने की बात भी सामने आई थी। उन्होंने सफाई देते हुए कहा था कि बच्चे भागवत कथा सुनने गए हैं, जबकि स्थानीय जानकारी के अनुसार कथा दोपहर बाद शुरू होती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार स्कूल में शिक्षकों की उपस्थिति नियमित नहीं है और मनमर्जी से अवकाश लेने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। वहीं कसडोल विकासखंड के कई अन्य स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी बनी हुई है, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
खबर प्रकाशित होने के बाद बीईओ द्वारा नोटिस जारी किया जाना प्रशासनिक सक्रियता का संकेत जरूर है, लेकिन अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या विभाग इस असंतुलित व्यवस्था को सुधारने के लिए ठोस कदम उठाएगा।
विशेष रूप से 15 छात्रों पर 4 शिक्षकों की तैनाती को लेकर सवाल बना हुआ है कि क्या अतिरिक्त शिक्षकों का अन्य जरूरतमंद स्कूलों में स्थानांतरण किया जाएगा।
फिलहाल प्रधानपाठक को तीन दिन के भीतर जवाब देना है। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस पूरे मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और ग्रामीण क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।












