हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। कसडोल विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत खरवे में भीषण जल संकट ने ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। हालात इतने खराब हैं कि ग्रामीणों को मजबूरी में महानदी का गंदा पानी पीना पड़ रहा है।

वर्ष 2020-21 में जल जीवन मिशन के तहत गांव में पानी टंकी का निर्माण कराया गया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बाद से ही टंकी बंद पड़ी है। करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद योजना धरातल पर दम तोड़ती नजर आ रही है।
टंकी खड़ी, बोर नहीं — नल कनेक्शन अधूरे
ग्रामीणों के मुताबिक टंकी का निर्माण तो कर दिया गया, लेकिन बोर खनन नहीं कराया गया। अधिकांश घरों में आज तक नल कनेक्शन नहीं लगाए गए हैं। नतीजतन गांव के लोगों को लगभग एक किलोमीटर दूर जाकर पानी लाना पड़ रहा है।

गांव में लगे हैंडपंप और बोर भी पर्याप्त पानी नहीं दे पा रहे हैं। ग्रीष्मकाल शुरू होने से पहले ही हालात गंभीर हो चुके हैं।
विभागीय सुस्ती पर उठे सवाल
लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग की कार्यशैली पर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि जब पांच वर्ष पहले टंकी बन चुकी है तो आज तक इसे चालू क्यों नहीं किया गया? कसडोल में पदस्थ एसडीओ मनोज दाकुड़े और विभाग के कार्यपालन अभियंता की जवाबदेही तय क्यों नहीं हो रही?
लक्ष्य आगे बढ़ा, जमीनी हकीकत पीछे
राष्ट्रीय स्तर पर 15 अगस्त 2019 को शुरू हुई जल जीवन मिशन योजना छत्तीसगढ़ में निविदा प्रक्रिया और कोरोना के कारण 2021 से गति पकड़ सकी। प्रारंभिक लक्ष्य दिसंबर 2024 तक सभी ग्रामीण घरों में नल से जल पहुंचाने का था, जिसे अब 2028 तक बढ़ा दिया गया है। अगस्त 2024 तक लगभग 79% कार्य पूर्ण होने और 39 लाख से अधिक घरों में नल कनेक्शन देने का दावा किया गया है।

लेकिन खरवे जैसे गांवों की स्थिति इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। टंकी बनने के बाद भी पानी न मिलना साफ दर्शाता है कि योजना कागजों में आगे है, जमीनी स्तर पर नहीं।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल टंकी चालू कर प्रत्येक घर तक नल कनेक्शन दिया जाए, अन्यथा वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।











