हेमन्त बघेल
“स्वच्छ भारत मिशन… करोड़ों खर्च… लेकिन ज़मीनी हकीकत बदहाल!
बलौदाबाजार। जिले के कसडोल जनपद पंचायत अंतर्गत बने सार्वजनिक शौचालय आज खुद अपनी बदहाली पर आशु बहा रहा हैं।

चार साल बीत गए, लेकिन एक भी शौचालय उपयोग लायक नहीं।कहीं ताले लगे हैं, कहीं टंकी नहीं, कहीं पानी नहीं…और सवाल पूछने पर अधिकारी गोलमोल जवाब देते नज़र आए।

ये तस्वीरें बलौदाबाजार जिले के कसडोल जनपद पंचायत क्षेत्र की हैं।
जहां स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष 2021–22 में लगभग साढ़े तीन लाख रुपए की लागत से, सौ से अधिक ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय बनाए गए थे।

मकसद था गांव को खुले में शौच से मुक्त करना, लेकिन हकीकत ये है कि चार साल बीत जाने के बाद भी
एक भी शौचालय उपयोग के लायक नहीं है।”
“कहीं पानी की व्यवस्था नहीं,कहीं सीट ही नहीं लगी, कहीं मल टंकी नहीं बनाई गई,
तो कहीं रखरखाव के अभाव में शौचालय जर्जर होकर दरकने लगे हैं। इन चार वर्षों में जिन शौचालयों पर लाखों खर्च हुए, उनका एक बार भी उपयोग नहीं हो सका।”

जब पत्रकारों ने जनपद पंचायत के कर्मचारियों से पूछा कि कितने शौचालय पूर्ण हैं, कितने अपूर्ण और किस पंचायत को कितनी राशि मिली तो सूची देने से साफ इनकार कर दिया गया। सूची मांगते ही अधिकारियों के पसीने छूट गए और जवाब गोलमोल हो गए।”



पत्रकारों के सवालों के बाद जहां-तहां लगे ताले तो खुलवाए गए, लेकिन अंदर का नज़ारा भ्रष्टाचार की कहानी खुद बयां कर रहा था।
ग्राम पंचायत नवागांव में
सार्वजनिक शौचालय के एक कमरे को पिछले चार साल से 800 रुपए प्रतिमाह किराए पर दे दिया गया। लेकिन इस राशि का एक भी रुपया साफ-सफाई पर खर्च नहीं हुआ। यहां 30 बोरी सीमेंट चार सालों से रखे-रखे खराब हो गए, दरवाजे टूटे पड़े हैं, न नल है, न पानी की व्यवस्था।”


रमेश कुमार/दुकानदार नवागांव
ग्राम पंचायत आमाखोआ में शौचालय तो बना, लेकिन मल टंकी बनाना ही भूल गए। परिणाम चार साल से शौचालय में ताला लगा है और जनता मजबूर है।”


ग्राम पंचायत खर्री में बिना उपयोग के ही शौचालय जर्जर हो चुका है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के बाद से ही सरपंच ने शौचालय में ताला लगा दिया।”


ग्राम पंचायत बैगनडबरी के सार्वजनिक शौचालय का बुरा हाल है, यहां के सीट उखड़ने लगे है वजह है भ्रष्टाचार के बुनियाद पर सार्वजनिक शौचालय का निर्माण कराया गया।

ग्राम पंचायत चिखली में बनाया गया सार्वजनिक शौचालय में न नल है, न बिजली है, न पानी है और ये भी चार से उपयोग के लायक नहीं ।

ग्राम पंचायत कंजिया का सार्वजनिक शौचालय इसे जगह में बनाया गया है जहां बिल्कुल भी पानी की व्यवस्था नहीं है इसके अलावा यहां भी से परेशानी है न नल, न पानी, न बिजली अब उपयोग होगा कैसे।



“सर, चार साल से शौचालय बंद पड़े हैं,
जिम्मेदार कौन है?”
जब इस पूरे मामले पर जनपद पंचायत सीईओ कमलेश साहू से सवाल किया गया, तो वे सवालों से बचते नज़र आए। सीईओ का कहना था कि ‘क्या 24 घंटे सरपंच शौचालय की रखवाली करेगा?’ और उन्होंने जांच की बात कहकरअपना पल्ला झाड़ लिया।”
कमलेश साहू/सीईओ जनपद पंचायत कसडोल
स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च हुए,
लेकिन ज़मीनी हकीकत ये है कि न शौचालय चालू हैं
और न जिम्मेदारी तय। अब देखना होगा कि
प्रशासन इस गंभीर मामले में कब जांच के आदेश देता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
संवाददाता हेमंत बघेल











