बस्तर: संतोष यादव
सुकमा ।जिले के झापरा गांव में भीमूल मंडूम साल में एक बार मनाया जाने वाला प्रमुख आदिवासी पारंपरिक पर्व है। यह पर्व प्रकृति, कृषि और ग्राम देवताओं के प्रति गहरी आस्था एवं कृतज्ञता का प्रतीक माना जाता है।

इस अवसर पर गांव के लोग धान और चावल के साथ विशेष जात्रा (धार्मिक आयोजन) करते हैं। जात्रा के दौरान पेरमा (ग्राम देव/देवी का प्रतीक) को पवित्र जल से स्नान कराया जाता है तथा विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। ग्रामीण अच्छी फसल, सुख-समृद्धि और गांव की खुशहाली की कामना करते हैं।

पूजा के उपरांत ग्रामीण पारंपरिक वेशभूषा में एकत्रित होकर ढोल-नगाड़ों की थाप पर सामूहिक नृत्य एवं गीत प्रस्तुत करते हैं। पूरे गांव में उत्साह और उमंग का माहौल रहता है।
भीमूल मंडूम केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की समृद्ध परंपरा, सांस्कृतिक विरासत और सामूहिक जीवनशैली का जीवंत उदाहरण भी है, जो आपसी भाईचारे, एकता और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ करता है।











