हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। जिले के उपवनमंडल कसडोल के अर्जुनी वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक 377 में शासन की महत्वाकांक्षी योजना राज्य कैंपा मद से किए गए पौधारोपण पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2022-23 में परिसर उत्तर महराजी क्षेत्र के लगभग 8 हेक्टेयर रकबे में 8800 पौधे लगाए गए थे, जिसके लिए शासन द्वारा लाखों-करोड़ों रुपये का बजट स्वीकृत किया गया था।

मगर हैरानी की बात यह है कि तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी यहां लगाए गए पौधों की हालत बेहद खराब है। मौके पर देखने पर पता चलता है कि कुल पौधों में से केवल लगभग 10 प्रतिशत पौधे ही जीवित नजर आ रहे हैं, जबकि करीब 90 प्रतिशत पौधे पूरी तरह सूख चुके हैं या मरने की कगार पर हैं।

वन विभाग के नियमों के अनुसार पौधारोपण के बाद कम से कम 5 वर्षों तक उसकी नियमित देखरेख, सुरक्षा और संरक्षण की जिम्मेदारी विभाग की होती है, ताकि पौधे बड़े होकर जंगल का रूप ले सकें। लेकिन यहां की स्थिति बिल्कुल उलट दिखाई देती है। तीन साल बाद भी पौधों की वृद्धि लगभग शून्य है। कई पौधे आज भी उसी हालत में दिखाई दे रहे हैं जैसे रोपण के समय लगाए गए थे — मुश्किल से एक फीट तक भी उनकी बढ़ोतरी नहीं हुई है।

सबसे बड़ी बात यह है कि इतने बड़े पौधारोपण कार्य की निगरानी के लिए मौके पर कोई कर्मचारी दिखाई नहीं देता। स्थानीय लोगों का कहना है कि पौधों की देखरेख के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की गई है।
चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि कक्ष क्रमांक 377 में पदस्थ वन रक्षक ललित कुमार वर्मा को भी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि पौधों की देखरेख कितने वर्षों तक की जानी है और इस कार्य के लिए शासन द्वारा कितनी राशि स्वीकृत की गई थी।
ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि जब वन संपदा की सुरक्षा और संवर्धन की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों को सौंपी गई है, वही अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम नजर आ रहे हैं, तो फिर जंगलों की रक्षा आखिर कैसे होगी?
करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पौधारोपण इस तरह सूख जाए तो यह न केवल सरकारी धन की बर्बादी है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के नाम पर की जा रही योजनाओं की वास्तविकता भी उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी इस गंभीर लापरवाही पर क्या कार्रवाई करते हैं या यह मामला भी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा।
इनका कहना
उसको एक बार फील्ड में वेरिफाई करना पड़ेगा, मै भी एक बार देख नहीं पाया हूं, फिलहाल मै अभी प्रवेशन में हूं , काफी सारा काम धाम था उसको देखते हैं, फील्ड में देखते है जो रिकवरी निकलेगा, जो नियंमतः कार्रवाई करेंगे।
गुलशन साहू, एसडीओ प्रशिक्षु अर्जुनी











