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    तिल्दा - नेवरा

    तिल्दा नेवरा में स्थित मां मावली मंदिर: 200 वर्षों पुराना आस्था का केंद्र, इतिहास और मान्यताओं से जुड़ी अनोखी कहानी

    Hemant BaghelBy Hemant BaghelMarch 23, 202602 Mins Read
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    गोर्वधन यदु 

    रायपुर। राजधानी से लगभग 38 किलोमीटर दूर स्थित तिल्दा नेवरा नगर पालिका परिषद क्षेत्र के बालाजी वार्ड क्रमांक 19, पुरानी बस्ती में विराजमान मां मावली मंदिर श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यह मंदिर करीब 200 वर्ष पुराना माना जाता है और इसकी ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है।

    मां मावली मंदिर केवल तिल्दा नेवरा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी उपस्थिति और मान्यता छत्तीसगढ़ के अन्य स्थानों जैसे धमधागढ़, फिंगेश्वर, सिंगापुर भाटापारा और बलौदाबाजार में भी देखने को मिलती है। मंदिर के निर्माण को लेकर कोई ठोस ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है, लेकिन जनश्रुतियों और किंवदंतियों में इसका विस्तृत वर्णन मिलता है।

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में यह क्षेत्र घने जंगलों से घिरा हुआ था। उस समय कल्चुरी राजाओं का शासन था और व्यापारी इस मार्ग से रतनपुर (जो उस समय छत्तीसगढ़ की राजधानी हुआ करता था) व्यापार के लिए जाया करते थे। रात होने पर व्यापारी इसी स्थान पर विश्राम करते थे। मंदिर के पास एक बौली और जलाशय होने के कारण यह स्थान पड़ाव के लिए उपयुक्त माना जाता था।

    किंवदंती के अनुसार, उसी क्षेत्र में एक खंडहरनुमा कुटिया में मां मावली की एक मूर्ति स्थापित थी। समय के साथ यहां गोंड राजाओं का शासन रहा, जिसके बाद मराठा और फिर अंग्रेजों का आधिपत्य स्थापित हुआ।

    करीब 100 वर्ष पूर्व स्वर्गीय हरिराम ठेठवार यदु बैगा यहां आकर बसे और मानव सेवा, गौ सेवा तथा जड़ी-बूटी से उपचार करने लगे। एक दिन जंगल में गाय चराते समय उनकी गायें खो गईं। काफी खोजबीन के बाद भी जब गायें नहीं मिलीं, तब उन्होंने मां मावली की मूर्ति के सामने सच्चे मन से प्रार्थना की और घी का दीप जलाने का संकल्प लिया। जब वे घर लौटे तो देखा कि सभी गायें सुरक्षित वापस आ चुकी थीं। इस घटना के बाद मंदिर की महिमा और भी फैल गई।

    इस चमत्कारी घटना की जानकारी गांव के मालगुजार राय बहादुर के परिवार तक पहुंची, जिसके बाद यहां पूजा-अर्चना और श्रद्धालुओं का आना-जाना बढ़ता गया। धीरे-धीरे यह स्थान एक प्रमुख धार्मिक स्थल के रूप में स्थापित हो गया।

    आज भी मां मावली मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है, जहां लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं और माता की कृपा प्राप्त करते हैं।

    Hemant Baghel
    Maa Maawali Temple in Tilda Nevra: A 200-year-old center of faith with a unique story related to history and beliefs.
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