584.11 लाख की परियोजना पर सवालों का साया
हेमंत बघेल
बलौदाबाजार जिले के कसडोल जलसंसाधन विभाग अंतर्गत उपसंभाग गिरौदपुरी के ग्राम पंचायत अर्जुनी में जोक नदी पर 584.11 लाख रुपये की लागत से चल रहे “जोक व्यपवर्तन शीर्ष कार्य के जीर्णोद्धार एवं डाउनस्ट्रीम तटबंध निर्माण” में भारी भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

घटिया मटेरियल से हो रहा निर्माण कार्य
सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य में निर्धारित मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि एक लोड निर्माण सामग्री में केवल 5 बैंकेट गिट्टी, 4 बैंकेट रेती और मात्र 15 बोरी सीमेंट का उपयोग किया जा रहा है, जिससे निर्माण की मजबूती पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रहे इस निर्माण में जानबूझकर घटिया सामग्री का इस्तेमाल कर शासन को लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

छड़ लगाने में भी भारी गड़बड़ी
जानकारी के मुताबिक जहां निर्माण कार्य में 25 सेंटीमीटर की दूरी पर सरिया (छड़) लगाना अनिवार्य है, वहीं ठेकेदार द्वारा 28 से 30 सेंटीमीटर की दूरी पर छड़ लगाई जा रही है। इससे निर्माण की गुणवत्ता कमजोर होने की आशंका जताई जा रही है।
एसडीओ की निगरानी पर उठे सवाल
पूरा निर्माण कार्य जल संसाधन विभाग के एसडीओ की देखरेख में कराया जा रहा है, लेकिन मौके पर किसी जिम्मेदार अधिकारी की मौजूदगी नहीं दिखाई दे रही है। आरोप है कि एसडीओ छुट्टी पर चले गए हैं और करोड़ों का निर्माण कार्य ठेकेदार के भरोसे छोड़ दिया गया है। स्थिति यह है कि निर्माण स्थल की निगरानी के लिए केवल दो चौकीदार — मोतीलाल चंदेल और खुशराम पटेल — को बैठा दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि चौकीदारों को न तकनीकी जानकारी है और न ही निर्माण के मापदंडों की समझ, ऐसे में गुणवत्ता की निगरानी कैसे होगी यह बड़ा सवाल है।
बिना तराई और मानक के जारी निर्माण
ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में न तो नियमित तराई की जा रही है और न ही निर्धारित मानकों के अनुसार सामग्री डाली जा रही है। अधिकारियों की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर ठेकेदार मनमानी तरीके से काम करा रहे हैं।
एक माह बाद भी नहीं लगा सूचना बोर्ड
निर्माण कार्य शुरू हुए एक माह से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक स्थल पर सूचना बोर्ड तक नहीं लगाया गया है। इससे कार्य की पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
चोरी की बिजली से चलता रहा निर्माण कार्य
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कई महीनों तक निर्माण कार्य चोरी की बिजली से कराया जाता रहा। शिकायत के बाद बिजली विभाग ने कनेक्शन तो काट दिया, लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई। इससे बिजली विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
कार्यपालन अभियंता की चुप्पी पर सवाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि मीडिया में लगातार खबरें प्रकाशित होने के बावजूद जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता अब तक मौके पर निरीक्षण करने नहीं पहुंचे हैं। इससे विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं।
ग्रामीणों की मांग – पहले जांच, फिर निर्माण
स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि जोक व्यपवर्तन शीर्ष कार्य के जीर्णोद्धार एवं डाउनस्ट्रीम तटबंध निर्माण कार्य पर तत्काल रोक लगाई जाए और पहले निर्माण गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच के बाद ही आगे का कार्य शुरू किया जाए।
अब देखना होगा कार्रवाई कब
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जल संसाधन विभाग के उच्च अधिकारी आखिर कब कुंभकर्णी नींद से जागेंगे और करोड़ों रुपये के इस निर्माण कार्य में सामने आ रहे भ्रष्टाचार की जांच कर संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करेंगे।




