हेमंत बघेल
कसडोल | क्षेत्र में इन दिनों प्रशासनिक व्यवस्था सवालों के घेरे में है। गिरौदपुरी के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) रामरतन दुबे को कसडोल एसडीएम के साथ-साथ जनपद पंचायत कसडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। एक ही अधिकारी को तीन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने से तीनों जगहों का कामकाज बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सरपंचों का कहना है कि प्रशासनिक फैसले के कारण विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है। जनपद पंचायत कसडोल में CEO का पद पहले कमलेश साहू के पास था, जिन्हें हटाकर यह अतिरिक्त प्रभार एसडीएम को दिया गया है। इसके बाद से पंचायत स्तर के कार्यों में स्पष्ट रूप से देरी और अव्यवस्था देखी जा रही है।
सरपंचों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एक अधिकारी के पास तीन-तीन जिम्मेदारियां होने से किसी भी विभाग को पूरा समय नहीं मिल पा रहा है, जिसका सीधा असर ग्रामीण विकास योजनाओं और आम जनता की समस्याओं के समाधान पर पड़ रहा है। पंचायतों में लंबित कार्य बढ़ते जा रहे हैं और समय पर निर्णय नहीं हो पा रहे हैं।
जनपद पंचायत कसडोल के कुछ सरपंचों ने नाम न छापने की एवज में शासन-प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द अलग से पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति की जाए, ताकि पंचायतों के कार्य सुचारू रूप से संचालित हो सकें।
सूत्रों का कहना है कि यदि जल्द ही इस स्थिति में सुधार नहीं किया गया, तो विकास कार्य पूरी तरह ठप हो सकते हैं। ऐसे में शासन को तत्काल संज्ञान लेकर प्रशासनिक व्यवस्था को दुरुस्त करना बेहद जरूरी हो गया है।












