हेमंत बघेल
कसडोल। जल संसाधन विभाग अंतर्गत उपसंभाग गिरौदपुरी में जोक नदी पर 584.11 लाख रुपये की लागत से चल रहे जोक व्यपवर्तन शीर्ष कार्य के जीर्णोद्धार एवं डाउनस्ट्रीम तटबंध निर्माण में भारी भ्रष्टाचार के आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों ने ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से कार्य में लापरवाही और अनियमितताओं का गंभीर आरोप लगाया है।

घटिया निर्माण पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण कार्य में तय मापदंडों का पालन नहीं किया जा रहा है। ठेकेदार विक्रम खंडेलवाल द्वारा उपयोग किए जा रहे मटेरियल की गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। लोगों का आरोप है कि कम मात्रा और निम्न स्तर की सामग्री का उपयोग कर कार्य किया जा रहा है, जिससे डैम और तटबंध की मजबूती पर खतरा मंडरा रहा है।
इतनी बड़ी लागत से बन रहे इस प्रोजेक्ट में गुणवत्ता से समझौता भविष्य में बड़े नुकसान का कारण बन सकता है।


प्रतिबंध के बावजूद रेत खनन
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि निर्माण में उपयोग की जा रही रेत प्रतिबंध के बावजूद अवैध रूप से खनन और परिवहन की जा रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, वन विभाग द्वारा स्पष्ट प्रतिबंध के बावजूद ठेकेदार खुलेआम रेत उत्खनन कर रहा है और उसी का उपयोग निर्माण कार्य में किया जा रहा है। इससे शासन को लाखों रुपये की रॉयल्टी का नुकसान हो रहा है।

बिजली चोरी का भी आरोप
निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही बिजली को लेकर भी बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा ग्राम पंचायत अर्जुनी से बिजली चोरी कर काम चलाया जा रहा है।
मौके पर जनरेटर होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया जा रहा, जबकि विभागीय कर्मचारी जनरेटर से बिजली लेने का दावा कर रहे हैं।

वन विभाग की भूमिका पर सवाल
जब क्षेत्र में रेत खनन पर प्रतिबंध है, तो फिर वन परिक्षेत्र अर्जुनी के अंतर्गत यह अवैध गतिविधि कैसे जारी है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि या तो वन विभाग को जानकारी नहीं है या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है।

बिना साइन बोर्ड के शुरू हुआ काम
निर्माण कार्य शुरू हुए एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन अब तक सूचना पटल (साइन बोर्ड) नहीं लगाया गया है।
नियम के अनुसार, कार्य प्रारंभ होने से पहले प्रोजेक्ट की पूरी जानकारी बोर्ड पर प्रदर्शित की जानी चाहिए, लेकिन यहां ऐसा नहीं किया गया।

अधिकारियों के बयान
वन परिक्षेत्र अधिकारी ने बताया कि जानकारी मिलते ही खनन रुकवाकर नोटिस जारी किया गया है और 7 दिनों में जवाब मांगा गया है।
वहीं, अनुविभागीय अधिकारी गिरौदपुरी ने खनन बंद कराने, बिजली कटवाने और निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की बात कही है।बड़ा सवाल
जब अधिकारियों की मौजूदगी में ही यह सब हो रहा था, तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?
क्या जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाएगी या इस मामले में ठोस कार्रवाई होगी?
फिलहाल पूरे मामले में प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।




