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    छत्तीसगढ़

    भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2026 की शुभ शुरुआत: छत्तीसगढ़ की प्राचीन धरोहर को मिलेगी नई पहचान – मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय.

    Hemant BaghelBy Hemant BaghelJanuary 2, 2026007 Mins Read
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    रायपुर 1 जनवरी 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज कबीरधाम ज़िले के भोरमदेव धाम में आयोजित कार्यक्रम में भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया। इस अवसर पर उन्होंने नववर्ष 2026 की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि नए वर्ष की शुरुआत ऐसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कार्य से होना छत्तीसगढ़ के लिए सौभाग्य की बात है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आज का दिन छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण है। भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना राज्य की प्राचीन धरोहर को नई ऊँचाइयों पर ले जाने का प्रतीक है। कबीरधाम जिले के इस भोरमदेव धाम में महादेव शिव की आराधना, अतुलनीय प्राकृतिक सौंदर्य और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत एक साथ
    दिखाई देती है।

    उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की स्वदेश दर्शन योजना 2.0 के तहत भोरमदेव कॉरिडोर विकास परियोजना का भूमिपूजन किया जा रहा है। यह परियोजना लगभग 146 करोड़ रुपये की लागत से वाराणसी के काशी विश्वनाथ कॉरिडोर की तर्ज पर विकसित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेहतर शुरुआत नए वर्ष की नहीं हो सकती थी और इस परियोजना के लिए उन्होंने समस्त छत्तीसगढ़वासियों को बधाई दी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भोरमदेव की महत्ता को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इस पहल के लिए केंद्रीय मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत के प्रति आभार व्यक्त किया।

    भोरमदेव मंदिर के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हरे-भरे वनांचल के बीच स्थित इस मंदिर को “छत्तीसगढ़ का खजुराहो” कहा जाता है। यह केवल मंदिर ही नहीं, बल्कि हजार वर्षों की साधना, स्थापत्य कला और सांस्कृतिक चेतना का जीवंत प्रतीक है। यहाँ भगवान शिव की पूजा भोरमदेव के रूप में की जाती है, जहाँ शैव दर्शन, लोक आस्था और आदिवासी परंपराएँ एक साथ मिलकर भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती हैं।

    उन्होंने कहा कि सावन के महीने में निकलने वाली कांवड़ यात्रा यहाँ की एक महत्वपूर्ण परंपरा है और उन्हें स्वयं कांवड़ियों का स्वागत करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक सौंदर्य के मध्य स्थित भोरमदेव मंदिर, मड़वा महल और छेरकी महल ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व रखते हैं। मंदिर की दीवारों पर उत्कीर्ण भव्य शिल्पाकृतियाँ खजुराहो की कला से तुलना योग्य हैं। नागवंशी शासनकाल में निर्मित नागर शैली की यह अद्वितीय वास्तुकला अपने आप में अद्भुत है। यह स्थल न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि क्षेत्रीय इतिहास, कला और सामाजिक जीवन का सशक्त साक्ष्य भी है।

    मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि महाशिवरात्रि पर यह स्थान प्रमुख तीर्थ के रूप में हजारों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है, जहाँ आदिवासी परंपराओं और शैव प्रथाओं का अनोखा संगम दिखाई देता है। मड़वा महल, जिसका संबंध विवाह मंडप से माना जाता है, तथा छेरकी महल की दीवारों पर अंकित वन और नदी से जुड़ी आकृतियाँ प्रकृति-निष्ठ जीवनदर्शन को दर्शाती हैं।

    उन्होंने कहा कि भोरमदेव का यह संपूर्ण क्षेत्र धर्म और अध्यात्म के साथ-साथ पर्यटन का भी बड़ा केंद्र है, जिसे वर्तमान सरकार व्यापक रूप से विकसित करने जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने पर्यटन को उद्योग का दर्जा प्रदान किया है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को संरचनात्मक मजबूती मिली है। नई पर्यटन नीति एवं होम-स्टे पॉलिसी के माध्यम से सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ रोजगार और निवेश के अवसर बढ़ रहे हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा सहित छत्तीसगढ़ के अनेक स्थानीय उत्सवों ने प्रदेश को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। हमारी सांस्कृतिक परंपराएँ केवल मंदिरों और स्थापत्य तक सीमित नहीं हैं; बल्कि नाचा परंपरा, 13 पारंपरिक वाद्ययंत्र, लोकनृत्य और गीत हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के दर्पण हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि धार्मिक आस्थाओं में यहाँ भगवान राम को ‘भाँचा राम’ या ‘वनवासी राम’ के रूप में पूजा जाता है क्योंकि उनके वनवास के लगभग 10 वर्ष दंडकारण्य क्षेत्र में व्यतीत हुए थे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में प्रशिक्षण देकर रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पूरे छत्तीसगढ़ में सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है तथा रेल और हवाई सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुँचना सरल होगा और पर्यटन को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था भी मज़बूत होगी। उन्होंने कहा कि पिछले दो वर्षों में 7.83 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनसे पर्यटन सहित विभिन्न क्षेत्रों को नई दिशा मिलेगी।

    केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भोरमदेव महोत्सव स्थल पर काॅरिडोर के भूमिपूजन के बाद सभा को संबोधित करते हुए कबीरधाम जिले सहित पूरे प्रदेश के लिए आज का दिन ऐतिहासिक है। उन्होंने नववर्ष की बधाई देते हुए कहा कि बीते दो वर्षों में छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों को धरातल पर उतारते हुए विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार करने का कार्य किया है। उन्होंने कहा कि नक्सलवाद प्रदेश के विकास में सबसे बड़ी बाधा थी, जिसे समाप्त करने का बीड़ा राज्य सरकार ने उठाया है और आज प्रदेश नक्सलवाद की समाप्ति की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इससे न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि पूरे देश के नागरिकों में यह विश्वास मजबूत हुआ है कि भारत को कमजोर करने वाली किसी भी ताकत या षड्यंत्र को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कठोर निर्णयों ने देश की सुरक्षा नीति को नई मजबूती प्रदान की है।

    केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि सुशासन का प्रभाव आज देश-दुनिया में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। भारत तेजी से विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर है। सड़कों, पुल-पुलियों एवं अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण के साथ-साथ प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, जल, बिजली, बैंक खाता और रोजगार जैसी सुविधाएं गरीबों के घर-घर तक पहुंच रही हैं।

    केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने कहा कि भोरमदेव मंदिर लगभग एक हजार वर्ष पुरानी ऐतिहासिक धरोहर है और इस कॉरिडोर निर्माण के माध्यम से आने वाले हजार वर्षों तक इसे संरक्षित रखने का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भोरमदेव मंदिर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भी विशेष आस्था का केंद्र रहा है और यह परियोजना उनके कार्यकाल की स्मृति के रूप में कबीरधाम जिले को एक नई पहचान देगी। केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत ने कहा कि यह वर्ष परिवर्तन का वर्ष है और भारत को विश्व का सबसे शक्तिशाली राष्ट्र बनाने के प्रधानमंत्री श्री मोदी के संकल्प में 140 करोड़ देशवासी सहभागी बनें।

    उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय द्वारा लगातार क्षेत्र का दौरा कर यहां के विकास के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। चैत्र माह के तेरहवीं तिथि को भोरमदेव महोत्सव का आयोजन किया जाता है, पिछले वर्ष जब स्वदेश दर्शन योजना में शामिल करने के लिए हमने केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत से निवेदन किया था और भोरमदेव महोत्सव के दिन हमें स्वीकृति प्राप्त हो गयी थी और आज भूमिपूजन भी सम्पन्न हो गया है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र में भोरमदेव की तरह ही आस्था का केंद्र माने जाने वाले पंचमुखी श्री बूढ़ा महादेव मंदिर का भी अब विकास किया जा रहा है।

    कार्यक्रम मे उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव, केन्द्रीय आवासन और शहरी कार्य राज्यमंत्री श्री तोखन साहू, सांसद श्री संतोष पाण्डेय, पंडरिया विधायक श्रीमती भावना बोहरा, पर्यटन मंडल के अध्यक्ष श्री नीलू शर्मा, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल, राज्य कृषक कल्याण परिषद् के अध्यक्ष श्री सुरेश चंद्रवंशी सहित अन्य गणमान्य नागरिक एवं जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।

    Hemant Baghel
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