हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। गांव की शांत रात में जो मौत पहले रहस्यमयी लग रही थी, उसने जांच के दौरान एक खौफनाक सच उजागर कर दिया। ग्राम बिनौरी में रामकुमार साय की मौत कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या थी—और सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि इस वारदात में उसके अपने ही परिवार के लोग शामिल निकले।

29 मार्च की रात से 30 मार्च की दरमियानी रात के बीच हुई इस घटना ने पूरे इलाके को हिला दिया। शुरुआत में मामला संदिग्ध मौत का लगा, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस की गहन जांच ने इसे हत्या साबित कर दिया। इसके बाद पुलिस ने मामले की परतें खोलनी शुरू कीं।

जांच के दौरान पुलिस ने मृतक की पत्नी मीना बाई साय, बड़े भाई महावीर साय और रिश्तेदार वैभव उर्फ अंशु बघेल से अलग-अलग पूछताछ की। मनोवैज्ञानिक और विश्लेषणात्मक तरीके से की गई पूछताछ में आरोपियों के बयान बदलते नजर आए और आखिरकार उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

आरोपियों ने बताया कि रामकुमार साय शराब का आदी था और रोज नशे में परिवार के साथ मारपीट और दुर्व्यवहार करता था। यहां तक कि उसकी नीयत अपनी ही बेटी के प्रति भी ठीक नहीं थी, जिससे परिवार के लोग मानसिक रूप से परेशान थे। इसी कारण तीनों ने मिलकर उसकी हत्या की योजना बनाई।
घटना की रात, जब रामकुमार सो रहा था, तब तीनों ने मिलकर गमछे से उसका गला घोंट दिया। हत्या के बाद सबूत मिटाने के लिए इस्तेमाल किए गए गमछे को पत्थर में बांधकर पास के कुएं में फेंक दिया गया।
पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर कुएं से गमछा और पत्थर बरामद किया, साथ ही घटना में प्रयुक्त मोबाइल फोन भी जब्त किए गए। फोरेंसिक टीम की मदद से भी मामले की पुष्टि हुई।
पुलिस ने तीनों आरोपियों—महावीर साय (40 वर्ष), मीना बाई साय (36 वर्ष) और वैभव उर्फ अंशु बघेल (19 वर्ष)—को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
इस पूरी कार्रवाई में पुलिस टीम की सूझबूझ, तकनीकी जांच और वैज्ञानिक तरीकों से की गई पड़ताल ने एक जटिल मामले को सुलझाने में अहम भूमिका निभाई।












