हेमंत बघेल
बलौदाबाजार/कसडोल।विकासखंड के ग्राम पंचायत आमाखोवा और खर्री में इन दिनों बड़े पैमाने पर अवैध ईंट भट्टों का संचालन धड़ल्ले से किया जा रहा है। सड़क किनारे चल रहे इन भट्टों से न केवल पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, रामचरण प्रजापति नामक व्यक्ति द्वारा खर्री और बिलारी क्षेत्र में नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर ईंट निर्माण किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह काम केवल एक-दो भट्टों तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे इलाके में दर्जनों अवैध भट्टे संचालित हो रहे हैं।
नियमों की उड़ रही धज्जियां, आबादी के बीच धुआं और खतरा
अवैध ईंट भट्टे रिहायशी इलाकों और मुख्य सड़कों के किनारे लगाए जा रहे हैं, जिससे:
वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है
लोगों को सांस और अन्य बीमारियों का खतरा
मिट्टी का अवैध खनन और पेड़ों की कटाई भी जारी

‘ईंट माफिया’ का सिंडिकेट?
सूत्रों की मानें तो रामचरण प्रजापति बाहरी जिले से आकर कसडोल क्षेत्र में एक तरह से ईंट माफिया का नेटवर्क खड़ा कर चुका है। बिलारी से लेकर खर्री तक उसके दर्जनों भट्टे संचालित होने की बात सामने आ रही है।

प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
इस पूरे मामले में जिला खनिज अधिकारी अवधेश बारीक और कसडोल एसडीएम रामरतन दुबे की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों और पत्रकारों का आरोप है कि:
कई बार शिकायत के बावजूद सिर्फ आश्वासन मिला
जमीनी स्तर पर कार्रवाई शून्य नजर आ रही है
क्षेत्र में 100 से अधिक अवैध ईंट भट्टे संचालित होने का दावा

कार्रवाई या ‘खाना पूर्ति’?
चर्चाएं यह भी हैं कि कार्रवाई के नाम पर केवल औपचारिकता निभाई जा रही है। कुछ लोगों का आरोप है कि इस पूरे खेल में मिलीभगत और संरक्षण की बू आ रही है।
बड़ा सवाल
जब हर सड़क और गांव में खुलेआम अवैध ईंट निर्माण हो रहा है, और अधिकारी उसी रास्ते से गुजरते हैं, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं?

जनता की चेतावनी
अब क्षेत्रीय लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाएंगे और जिम्मेदार अधिकारियों को जवाब देना होगा।
अब देखना होगा कि प्रशासन जागता है या फिर अवैध ईंट भट्टों का यह खेल यूं ही चलता रहेगा।
इस सम्बन्ध में जिले के खनिज अधिकारी अवधेश बारीक से संपर्क करना चाहा लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो पाया












