हेमंत बघेल
कसडोल । विकासखंड के समीपस्थ आदर्श ग्राम देवरीकला में छत्तीसगढ़ का पारंपरिक लोकपर्व भोजली गुरुवार को हर्षोल्लास और गरिमामय माहौल में मनाया गया। इस अवसर पर गांव की महिलाओं एवं कुंवारी कन्याओं ने भोजली दाई की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और अच्छी फसल की कामना की।

मिली जानकारी के अनुसार, पिछले नौ दिनों से ग्रामीणों के घरों में भोजली बोकर उसकी सेवा-पूजा की जा रही थी। गुरुवार को विसर्जन के अवसर पर पूरा गांव उत्सव के रंग में सराबोर नजर आया। रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं एवं युवतियां सिर पर भोजली की टुकनी लेकर बाजे-गाजे के साथ शोभायात्रा में शामिल हुईं।
शोभायात्रा के दौरान पारंपरिक लोकगीत “अहो देवी गंगा, लहर-लहर करे भोजली” से पूरा गांव गुंजायमान रहा। शोभायात्रा गांव के प्रमुख मार्गों से होते हुए स्थानीय तालाब पहुंची, जहां विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद भोजली दाई का विसर्जन किया गया।
भोजली विसर्जन के बाद ग्रामीणों ने एक-दूसरे के कानों में भोजली की हरी पत्तियां लगाकर आपसी प्रेम और भाईचारे का प्रतीक ‘मितान’ और ‘सखा’ का रिश्ता कायम किया। इस परंपरा ने छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक-संस्कृति और सामाजिक सौहार्द की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण हुए शामिल
भोजली पर्व के आयोजन में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए। कार्यक्रम में मुख्य रूप से जिला पंचायत सदस्य श्रीमती प्रेमलता वैष्णव, ग्राम पंचायत देवरीकला के सरपंच बालेश्वर वैष्णव, उपसरपंच श्रीमती अंजली पैकरा सहित पंच पूजा वैष्णव, रमादेवी यादव, हरिमती केंवट एवं ग्राम पटेल मनीराम घृतलहरे उपस्थित रहे
इसके अलावा कोदूराम जांगड़े, अजय यादव, पंकज पैकरा, रामाधर कैवर्त, कुमारदास वैष्णव, सूरज मन दास वैष्णव, डुर्गेश्वर वैष्णव, चिमन पैकरा, साहेब लाल पैकरा, आनंद राम पैकरा, दिलीप पैकरा, चैनसिंह पैकरा, बुधराम जांगड़े, शोभित घृतलहरे, घनश्याम घृतलहरे, बाबूलाल केंवट, भंवर सिंह पैकरा, शुकवारा यादव, अरुण ध्रुव सहित बड़ी संख्या में मातृशक्ति एवं ग्रामीणजन मौजूद रहे।
भोजली पर्व के माध्यम से ग्रामीणों ने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक-संस्कृति, आपसी भाईचारे और सामाजिक समरसता को जीवंत रखते हुए नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली परंपराओं से जोड़ने का संदेश दिया।










































