बगबुड़ा में बिना डिग्री-लाइसेंस मरीजों का इलाज करने का दावा, स्वास्थ्य विभाग ने जांच का दिया आश्वासन
हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लवन अंतर्गत ग्राम पंचायत बगबुड़ा में मुख्य मार्ग के किनारे संचालित बीरेंद्र मेडिकल स्टोर्स को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मेडिकल स्टोर्स के पीछे बने एक छोटे कमरे में कथित तौर पर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। आरोप है कि यहां बिना मान्य चिकित्सा डिग्री, वैध पंजीयन अथवा आवश्यक दस्तावेजों के मरीजों को उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि मेडिकल स्टोर्स की आड़ में कथित क्लिनिक का संचालन लंबे समय से किया जा रहा है। ग्रामीणों के अनुसार मेडिकल संचालक बीरेंद्र वर्मा की मौजूदगी में मरीजों का इलाज किए जाने की बात सामने आती रही है। वहीं कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने दावा किया कि उनके मेडिकल स्टोर्स में मौजूद नहीं रहने पर पास में किराना दुकान संचालित करने वाला एक युवक भी मरीजों को देखने का काम करता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

मरीजों की सुरक्षा को लेकर उठे सवाल
यदि बिना योग्य चिकित्सक और आवश्यक अनुमति के मरीजों का उपचार किया जा रहा है तो किसी मरीज की हालत बिगड़ने अथवा किसी अप्रिय घटना की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
बताया जाता है कि बगबुड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लवन से महज करीब 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्रामीणों का आरोप है कि लवन क्षेत्र के विभिन्न गांवों में कई कथित झोलाछाप लोगों द्वारा चिकित्सा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इसके बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
पुराने मामले की भी चर्चा
स्थानीय सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि बगबुड़ा क्षेत्र में कथित रूप से इलाज के दौरान एक महिला की मौत का मामला सामने आया था, लेकिन शिकायत नहीं होने के कारण मामला आगे नहीं बढ़ सका। इस दावे की भी स्वतंत्र एवं आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग द्वारा क्षेत्र में संचालित निजी क्लिनिक, मेडिकल स्टोर, पैथोलॉजी सेंटर और अन्य चिकित्सा संस्थानों की जांच किए जाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

प्राइवेट अस्पतालों में मरीज भेजने के आरोप भी गंभीर
ग्रामीणों और सूत्रों की ओर से सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों से निजी अस्पतालों में मरीज भेजे जाने के बदले कथित रूप से आर्थिक लेन-देन के आरोप भी लगाए गए हैं। दावा किया जा रहा है कि मरीजों को निजी अस्पताल भेजने पर 5 से 10 हजार रुपये तक दिए जाने का कथित खेल लंबे समय से चल रहा है। हालांकि इन आरोपों की भी पुष्टि नहीं हुई है और इसकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकती है।
यदि इस तरह के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करेगा, बल्कि मरीजों के हितों के साथ भी खिलवाड़ माना जाएगा। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है।
बीएमओ ने कहा- कराई जाएगी जांच
इस मामले में खंड चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नवदीप बांधे ने जांच कराने की बात कही है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में बीरेंद्र मेडिकल स्टोर्स में कथित रूप से संचालित क्लिनिक और मरीजों के उपचार से जुड़े आरोप कितने सही पाए जाते हैं।
फिलहाल जांच के आश्वासन के बाद लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई पर टिकी है। क्या जांच के बाद नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई होगी या फिर बगबुड़ा में कथित रूप से चल रहा यह उपचार का सिलसिला जारी रहेगा, यह आने वाला समय बताएगा।










































