हेमंत बघेल
यह जोकनदी है, जो बरसों से निर्मलधारा बहाती आ रही है। आसपास बसे लोग जोकनदी में तरबूज, खरबूज और सब्जी लगाकर अपनी जीविका का एक साधन बनाए हुए हैं। सुबह बहती जोकनदी की कल-कल की आवाज मनमोह लेती है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से किए जा रहे रेत उत्खनन से जोकनदी का अस्तित्व आज खतरे में नजर आ रहा है।

जी हां, हम बात कर रहे हैं छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल विकासखंड की, जहां रात होते ही बड़ी-बड़ी जेसीबी मशीनों के जरिए जोकनदी से रेत उत्खनन किए जाने की शिकायत सामने आ रही है। कसडोल से करीब 18 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत डेराडीह में पिछले कई महीनों से रेत उत्खनन का कथित अवैध कारोबार पनपने की बात कही जा रही है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, जैसे ही रात 9 से 10 बजता है, वैसे ही ट्रैक्टर के माध्यम से पहले रेत को जोकनदी से बाहर निकाला जाता है और इसके बाद जेसीबी मशीन से रेत को हाईवा में लोड किया जाता है। आरोप है कि पर्यावरण और एनजीटी के नियमों को दरकिनार करते हुए रात के समय भारी मात्रा में रेत का उत्खनन किया जा रहा है।

शिकायतों के बाद भी कार्रवाई नहीं होने पर सवाल
मामले में खनिज विभाग की कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि लगातार शिकायतें मिल रही हैं तो खनिज विभाग कार्रवाई करने से क्यों कतरा रहा है? क्या किसी प्रभावशाली व्यक्ति के संरक्षण की वजह से कार्रवाई नहीं हो पा रही है? स्थानीय लोगों द्वारा इस तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो डेराडीह में खुलेआम रेत उत्खनन कराया जा रहा है। सूत्रों ने इसके लिए सरपंच पति और विधायक प्रतिनिधि चंद्रभान साहू का नाम लिया है।
सूत्रों का यह भी दावा है कि जब रात के समय जोकनदी से रेत का उत्खनन किया जाता है, उस दौरान सरपंच पति एवं विधायक प्रतिनिधि चंद्रभान साहू अमोदी चौक में बैठकर कथित रूप से पहरा देते हैं, ताकि किसी अधिकारी के आने की सूचना उत्खनन में लगे लोगों तक पहुंचाई जा सके।
जिले में रेत घाट बंद होने का उठाया जा रहा फायदा?
जानकारी के मुताबिक, बलौदाबाजार जिले में वर्तमान में कोई रेत घाट स्वीकृत नहीं होने के कारण पिछले कई महीनों से रेत घाट बंद हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी का फायदा उठाकर डेराडीह में रात के अंधेरे की आड़ में रेत का कथित अवैध उत्खनन धड़ल्ले से चल रहा है।
रेत उत्खनन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह जोकनदी से रेत का उत्खनन जारी रहा तो आने वाले समय में नदी के अस्तित्व के साथ-साथ आसपास के लोगों की आजीविका पर भी इसका असर पड़ सकता है।
अब सवाल यह है कि जोकनदी में कथित रूप से चल रहे रेत उत्खनन पर जिला खनिज विभाग कब कार्रवाई करता है? क्या विभाग मौके पर जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाएगा? या फिर यह मामला भी शिकायतों तक ही सीमित रह जाएगा?
इस संबंध में जिला खनिज अधिकारी अवधेश बारिक ने आपके माध्यम से जानकारी मिलने की पुष्टि करते हुए निश्चित रूप से कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब देखना होगा कि खनिज विभाग इस मामले में कब तक कार्रवाई करता है। फिलहाल मामले में विभागीय कार्रवाई को लेकर जनता की पैनी नजर बनी हुई है।










































