हेमंत बघेल
कसडोल । विकासखंड में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिला बलौदाबाजार-भाटापारा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कसडोल में 19 ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारियों (RHO) का संलग्नीकरण समाप्त कर उन्हें उनके मूल पदस्थापना स्थल पर लौटने का आदेश जारी किया गया, लेकिन आदेश के बावजूद कर्मचारी अब तक ज्वाइन नहीं कर रहे हैं।

आदेश के बाद भी नहीं लौटा स्टाफ
खंड चिकित्सा अधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश (क्रमांक 574, दिनांक 27.03.2026) में स्पष्ट रूप से निर्देश दिए गए थे कि सभी संलग्न RHO तत्काल प्रभाव से अपने मूल पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के निर्देशों के तहत की गई थी, ताकि स्वास्थ्य संस्थाओं में स्टाफ की संतुलित व्यवस्था सुनिश्चित हो सके।
लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। आदेश मिलने के बावजूद अधिकांश RHO अपने मूल पदस्थापना स्थल पर नहीं पहुंचे हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं पर असर
RHO की अनुपस्थिति का सीधा असर गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। कई आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच रही है।
बीएमओ की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में कसडोल की ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. वंदना भेले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि वे कर्मचारियों को मूल पदस्थापना स्थल पर ज्वाइन कराने के लिए सख्ती नहीं दिखा रही हैं।
जब इस संबंध में उनसे बात की गई तो उन्होंने 15 अप्रैल के बाद जानकारी देने की बात कहकर जवाब देने से फिलहाल बचने की कोशिश की।
विधानसभा तक पहुंचा मामला, फिर भी लापरवाही
सूत्रों के अनुसार यह मामला विधानसभा तक भी पहुंच चुका है, जिसके बाद प्रशासन ने सख्त निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद आदेश की खुलेआम अवहेलना हो रही है, जो प्रशासनिक नियंत्रण पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रशासन का उद्देश्य क्या था?
प्रशासन का मानना था कि इस निर्णय से सभी स्वास्थ्य केंद्रों में स्टाफ की उपलब्धता संतुलित होगी और ग्रामीण मरीजों को बेहतर इलाज मिल सकेगा।
लेकिन वर्तमान स्थिति में आदेश का पालन न होने से पूरा उद्देश्य ही प्रभावित होता दिख रहा है।
इन RHO को किया गया था रिलीव
आदेश में ममता पैंकरा, चंद्रहास जायसवाल, संतोष यादव, कृष्ण नारायण ध्रुव, दयानंद कंवर, विजय कुमार सिदार, ऋषिकेश साहू, सुरेंद्र धृतलहरे, तरुण कुमार, नारायण प्रसाद साहू, अशोक साहू, मनीष साहू, सुखदेव डडसेना, लक्ष्मी प्रसाद साहू, मोहन लाल साहू, भास्कर वर्मा, गजेंद्र दास और केशव साहू सहित कुल 19 RHO के नाम शामिल हैं।
बड़ा सवाल
👉 जब शासन ने आदेश जारी कर दिया, तो पालन क्यों नहीं हो रहा?
👉 क्या अधिकारियों की ढिलाई से स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा रही है?
👉 आखिर ग्रामीणों को इसका खामियाजा कब तक भुगतना पड़ेगा?
निष्कर्ष
कसडोल का यह मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर तस्वीर पेश करता है। यदि जल्द ही कार्रवाई नहीं हुई, तो इसका सीधा असर आम जनता के स्वास्थ्य पर पड़ता रहेगा।




