हेमंत बघेल
रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश के प्रांताध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता विक्रम राय गुरुजी ने स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन (PM POSHAN) योजना के तहत कार्यरत रसोइयों, सहायिकाओं और संविदा कर्मचारियों को पिछले चार माह से मानदेय एवं वेतन नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। उन्होंने इसे गरीब और जरूरतमंद कर्मचारियों के साथ अन्याय, अमानवीय व्यवहार और शोषण बताया है।

विक्रम राय गुरुजी ने कहा कि मध्यान्ह भोजन तैयार करने वाली अधिकांश महिलाएं गरीब, विधवा एवं पिछड़े वर्ग से आती हैं। महज 2000 से 2500 रुपये के मानदेय में वे प्रतिदिन बच्चों के लिए भोजन तैयार करती हैं। चार माह से भुगतान नहीं होने के कारण उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और घर का चूल्हा जलाना मुश्किल हो रहा है।
उन्होंने कहा कि शासकीय कार्यालयों में कार्यरत संविदा सफाई कर्मचारी, चौकीदार सहित अन्य कर्मचारियों को भी कई माह से वेतन नहीं मिला है। वहीं स्कूलों में कार्यरत सफाईकर्मियों की स्थिति भी चिंताजनक है। करीब 3000 रुपये मासिक आय वाले सफाईकर्मियों को चार माह से भुगतान नहीं मिलने से उनके परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक परेशानी उत्पन्न हो गई है।
सरकार की कथनी-करनी पर उठाए सवाल
विक्रम राय गुरुजी ने कहा कि एक ओर सरकार गरीब कल्याण और अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर गरीब और कम आय वाले कर्मचारियों का ही भुगतान रोक दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर यह कैसा न्याय है?
रखी गईं प्रमुख मांगें
उन्होंने शासन से मांग की है कि—
मध्यान्ह भोजन कुकिंग कॉस्ट एवं सभी संविदा कर्मचारियों के चार माह के बकाया भुगतान का 7 दिनों के भीतर भुगतान किया जाए।
मध्यान्ह भोजन रसोइयों का मानदेय बढ़ाया जाए।
भविष्य में प्रत्येक माह की 5 तारीख तक मानदेय का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
मध्यान्ह भोजन रसोइयों को शासकीय कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
स्कूलों में कार्यरत सभी सफाईकर्मियों को नियमित किया जाए।
विक्रम राय गुरुजी ने चेतावनी दी कि यदि 7 दिनों के भीतर बकाया भुगतान नहीं किया गया, तो छत्तीसगढ़ संकुल शैक्षिक समन्वयक संघ द्वारा प्रदेशभर के जिला मुख्यालयों में धरना-प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी होगी।










































