हेमंत बघेल
कसडोल। विकासखंड कसडोल के दूरस्थ ग्राम तालदादर में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक बार फिर सामने आई है। ग्राम पंचायत नवागांव के आश्रित ग्राम तालदादर स्थित शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला का भवन पिछले तीन वर्षों से जर्जर अवस्था में पड़ा हुआ है। स्कूल की छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुकी है, जिसके कारण बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा नहीं मिल पा रही है।

ग्रामीणों के अनुसार भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है। इसी वजह से स्कूल भवन में पढ़ाई बंद कर बच्चों को कभी निजी मकान तो कभी अतिरिक्त भवन में बैठाकर पढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में सभी कक्षाओं के विद्यार्थियों को एक साथ अतिरिक्त भवन में बैठाना पड़ रहा है, जिससे पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बच्चों को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है।

तीन साल से मरम्मत का इंतजार, जिम्मेदार विभाग मौन
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल भवन की मरम्मत और नए भवन की मांग को लेकर कई बार कलेक्टर, जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) और विकासखंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) को आवेदन दिया जा चुका है, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लगातार शिकायतों के बावजूद स्कूल भवन की स्थिति जस की तस बनी हुई है।

ग्रामीणों का आरोप है कि शिक्षा विभाग और संबंधित जिम्मेदार अधिकारी बच्चों के भविष्य को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। यदि समय रहते भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो आगामी शैक्षणिक सत्र में बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो सकती है।
मरम्मत के नाम पर तोड़ी गई छत, फिर बंद हो गया काम
ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल भवन के जीर्णोद्धार के लिए आरईएस (ग्रामीण यांत्रिकी सेवा) विभाग को राशि स्वीकृत हुई थी। इसके बाद मरम्मत कार्य शुरू भी किया गया और भवन की छत को तोड़ दिया गया। लेकिन कुछ समय बाद निर्माण कार्य अचानक बंद हो गया और फिर दोबारा शुरू नहीं हुआ।
अब स्थिति यह है कि छत टूटने के कारण भवन उपयोग योग्य नहीं बचा है। ग्रामीणों का आरोप है कि जीर्णोद्धार कार्य में स्वीकृत लाखों रुपये की राशि का सही उपयोग नहीं हुआ, जिसके कारण आज सैकड़ों बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
स्कूल खुलने से पहले मरम्मत नहीं हुई तो नहीं भेजेंगे बच्चे
गांव के पालकों और ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि यदि स्कूल खुलने से पहले भवन की मरम्मत नहीं कराई गई तो वे अपने बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे। उनका कहना है कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और जर्जर भवन या अव्यवस्थित व्यवस्था के बीच पढ़ाई कराना उचित नहीं होगा।
ग्रामीणों का सवाल है कि जब कई बार प्रशासन और शिक्षा विभाग को लिखित शिकायत दी जा चुकी है, तब भी आखिर स्कूल भवन की मरम्मत क्यों नहीं हो रही है? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
कलेक्टर को सौंपा गया आवेदन
ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर को सौंपे गए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि ग्राम तालदादर में शासकीय विद्यालय भवन नहीं होने के कारण पिछले तीन वर्षों से बच्चों की पढ़ाई वैकल्पिक स्थानों पर संचालित की जा रही है। इससे विद्यार्थियों और पालकों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आवेदन में शीघ्र नए भवन की स्वीकृति या भवन मरम्मत की मांग की गई है।
क्या कहते हैं अधिकारी
इस संबंध में आरईएस विभाग के एसडीओ टिकेंद्र पटेल ने कहा कि वे हाल ही में पदस्थ हुए हैं। उनके अनुसार जिस समय निर्माण कार्य शुरू हुआ था, उस दौरान कोई अन्य अधिकारी पदस्थ था। उन्होंने कहा कि मामले की जानकारी लेकर उच्च अधिकारियों से चर्चा की जाएगी और उसके बाद ही विस्तृत जानकारी दी जा सकेगी।
इस मामले पर विकासखंड शिक्षा अधिकारी अरविंद ध्रुव ने बताया कि भवन के लिए प्रस्ताव भेज दिया है और वैकल्पिक व्यवस्था किया जाएगा
बड़ा सवाल
शैक्षणिक सत्र शुरू होने में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि तालदादर के बच्चे आखिर पढ़ेंगे कहां? तीन वर्षों से जर्जर भवन, अधूरा जीर्णोद्धार और प्रशासनिक उदासीनता के बीच बच्चों का भविष्य दांव पर लगा हुआ है। अब देखना होगा कि प्रशासन और शिक्षा विभाग इस गंभीर समस्या पर कब तक कार्रवाई करते हैं।




