हेमंत बघेल
कसडोल। शिक्षा विभाग में नियम-कायदों का पालन कराने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और कर्मचारियों पर है, उन्हीं के कार्यालय में नियमों की खुलेआम अनदेखी का मामला सामने आया है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) कार्यालय कसडोल में पदस्थ सहायक ग्रेड-2 डी.के. अनंत का कार्यालय परिसर में गुड़ाखू घिसते हुए वीडियो सामने आया है, जिसने विभाग की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विडंबना यह है कि जिस कार्यालय के बाहर “तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान” का बोर्ड लगा हुआ है और जहां स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि शिक्षण संस्थान के 100 गज के दायरे में सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री और उपयोग दंडनीय अपराध है, उसी कार्यालय के भीतर एक शासकीय कर्मचारी खुलेआम गुड़ाखू का सेवन करते दिखाई दे रहा है।

जानकारी के अनुसार, विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रतिदिन ब्लॉक भर के शिक्षक, कर्मचारी एवं आम नागरिक विभिन्न कार्यों के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में कार्यालय के भीतर इस प्रकार तंबाकू उत्पाद का उपयोग न केवल शासकीय गरिमा के विपरीत माना जा रहा है, बल्कि यह अन्य कर्मचारियों और आने-जाने वालों के लिए भी गलत संदेश देने वाला है।
पत्रकारों के सवाल पर मुंह छिपाते नजर आए कर्मचारी
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब पत्रकारों ने सहायक ग्रेड-2 डी.के. अनंत से कार्यालय में गुड़ाखू सेवन को लेकर सवाल पूछा तो वे कैमरे से बचते हुए मुंह छिपाकर निकल गए और इस संबंध में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। इसका वीडियो भी चर्चा का विषय बना हुआ है।
नियम बनाने वाले ही नियम तोड़ते दिखे
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षा विभाग स्वयं तंबाकू मुक्त वातावरण का संदेश देता है और इसके लिए कार्यालय परिसर में सूचना बोर्ड लगाया गया है, तब उसी कार्यालय में कर्मचारियों द्वारा नियमों की अवहेलना किसके संरक्षण में की जा रही है? यदि विभागीय कार्यालयों में ही ऐसे नियमों का पालन नहीं होगा तो स्कूलों और विद्यार्थियों तक क्या संदेश जाएगा?

कोटपा अधिनियम की भावना पर भी सवाल
तंबाकू नियंत्रण के लिए लागू कोटपा (COTPA) अधिनियम, 2003 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान एवं तंबाकू संबंधी गतिविधियों को नियंत्रित करने के प्रावधान हैं। शिक्षा विभाग लगातार स्कूलों को तंबाकू मुक्त बनाने के निर्देश जारी करता रहा है। ऐसे में शिक्षा विभाग के कार्यालय में इस तरह की घटना विभागीय निर्देशों की भावना के विपरीत मानी जा रही है।
उच्च अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
वीडियो सामने आने के बाद अब लोगों की निगाहें जिला शिक्षा विभाग और उच्च अधिकारियों पर टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या मामले की जांच कर संबंधित कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएगा।
फिलहाल, तंबाकू मुक्त कार्यालय के दावे और कार्यालय के भीतर दिखाई दे रही वास्तविकता के बीच का यह विरोधाभास शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।




