जांजगीर न्यायालय का बड़ा फैसला, तीन आरोपियों को उम्रकैद और जुर्माने की सजा
हेमंत बघेल
जांजगीर। जिला एवं सत्र न्यायालय, जांजगीर ने अपहरण, लूट और हत्या के चर्चित मामले में तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने हत्या, अपहरण, लूट और साक्ष्य मिटाने के अपराध में प्रत्येक आरोपी पर अलग-अलग धाराओं के तहत कारावास एवं कुल ₹40,000 के अर्थदंड का भी आदेश दिया है।

लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर के अनुसार, यह मामला 13-14 अप्रैल 2024 का है। मृतक रमाकांत तिवारी, जो किराये की कार चलाते थे, को मोबाइल के माध्यम से कार बुक कर कोटमी सोनार से अमरकंटक ले जाने के लिए बुलाया गया था। रास्ते में तीनों आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से वाहन रुकवाया और पत्थर से हमला कर उनकी हत्या कर दी।
हत्या के बाद आरोपी शव को कार में रखकर उसे ठिकाने लगाने निकले, लेकिन लोगों की आवाजाही और पुलिस की सक्रियता के चलते शव नहीं छिपा सके। बाद में शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया। पुलिस जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल कॉल डिटेल, गवाहों के बयान और अन्य प्रमाणों के आधार पर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
अदालत में अभियोजन पक्ष ने कुल 15 गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्य प्रस्तुत किए। सभी साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने पाया कि तीनों आरोपियों ने आपराधिक षड्यंत्र रचकर अपहरण, लूट और हत्या की वारदात को अंजाम दिया।
न्यायालय ने सुनाई यह सजा
दोषी पाए गए तीनों आरोपियों को भारतीय न्याय संहिता/भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत:
धारा 302 (हत्या) – आजीवन कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना
धारा 397/120-बी (लूट एवं षड्यंत्र) – आजीवन कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना
धारा 364 (अपहरण) – आजीवन कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना
धारा 201 (साक्ष्य मिटाना) – आजीवन कारावास एवं ₹10,000 जुर्माना
वहीं, एक अन्य आरोपी को साक्ष्य के अभाव में इन आरोपों से दोषमुक्त करते हुए केवल धारा 201 के तहत 6 माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई।
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक संदीप सिंह बनाफर ने प्रभावी पैरवी की, जिसके आधार पर न्यायालय ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया।




