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    स्कूल समय से पहले बंद, बच्चों को छुट्टी देकर कहां जाते हैं हेडमास्टर

    Hemant BaghelBy Hemant BaghelSeptember 9, 202602595 Mins Read
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    शासकीय प्राथमिक शाला चकरबाय में 11:30 बजे ही बच्चों को कर दिया गया रवाना, स्कूल पहुंचने पर मिला ताला; शिकायत के बाद दोबारा खोला गया स्कूल

    हेमंत बघेल 
    कसडोल। एक तरफ समाज में डॉक्टर को जीवन बचाने और शिक्षक को ज्ञान देने के कारण सम्मान के साथ भगवान का दर्जा दिया जाता है, वहीं दूसरी तरफ यदि कोई शिक्षक अपने कर्तव्यों से विमुख होकर नौनिहालों की पढ़ाई के साथ लापरवाही करे तो यह पूरी शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।

    ऐसा ही एक मामला कसडोल विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला चकरबाय से सामने आया है, जहां ग्रामीणों की शिकायत के बाद स्कूल पहुंचे शिक्षा विभाग के विधायक प्रतिनिधि को स्कूल में ताला लगा मिला। ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल के हेडमास्टर ने निर्धारित समय से पहले ही बच्चों की छुट्टी कर दी और स्वयं भी स्कूल से चले गए।

    11:30 बजे ही बच्चों को छुट्टी देने का आरोप
    मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को शिक्षा विभाग के विधायक प्रतिनिधि विजय साहू ग्रामीणों की शिकायत के बाद शासकीय प्राथमिक शाला चकरबाय पहुंचे। इस दौरान स्कूल में ताला लगा हुआ था। स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि स्कूल के हेडमास्टर कुमार रात्रे ने करीब 11:30 बजे ही बच्चों को छुट्टी देकर स्कूल बंद कर दिया और वहां से चले गए।

    ग्रामीणों का कहना है कि निर्धारित समय से पहले स्कूल बंद किए जाने का यह मामला पहली बार नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि हेडमास्टर द्वारा कथित तौर पर अक्सर बिना पर्याप्त कारण बच्चों को समय से पहले छुट्टी दे दी जाती है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

    स्कूल में दो शिक्षक, एक छुट्टी पर और दूसरे पर स्कूल बंद करने का आरोप
    बताया गया कि शासकीय प्राथमिक शाला चकरबाय में कुल दो शिक्षक हैं। इनमें से एक शिक्षक उस दिन छुट्टी पर था, जबकि दूसरे शिक्षक यानी हेडमास्टर के स्कूल समय में ही स्कूल बंद कर चले जाने की बात सामने आई।
    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई के लिए निर्धारित समय तय है और उस दिन कोई शासकीय अवकाश भी नहीं था, तो आखिर स्कूल को समय से पहले बंद करने की नौबत क्यों आई?
    यदि ग्रामीणों के आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल विभागीय नियमों की अनदेखी है, बल्कि बच्चों के शिक्षा के अधिकार और उनके भविष्य के साथ भी गंभीर खिलवाड़ माना जाएगा।

    नशे के सेवन को लेकर भी ग्रामीणों ने लगाए आरोप
    ग्रामीणों ने हेडमास्टर कुमार रात्रे पर स्कूल में शराब, गुड़ाखू और तंबाकू जैसे नशीले पदार्थों का सेवन कर आने के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन आरोपों की भी शिक्षा विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच किए जाने की जरूरत है।

    VSK ऐप के बावजूद व्यवस्था पर सवाल

    राज्य सरकार द्वारा स्कूल शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से VSK ऐप सहित डिजिटल निगरानी व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत शिक्षकों को स्कूल पहुंचने और स्कूल से निकलने के समय चेक-इन एवं चेक-आउट जैसी प्रक्रिया का पालन करना होता है।
    लेकिन चकरबाय स्कूल में सामने आए मामले ने डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था की निगरानी पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
    सूत्रों के अनुसार कुछ शिक्षक कथित तौर पर स्कूल पहुंचकर ऐप में अपनी उपस्थिति दर्ज करने के बाद वापस घर या अन्य स्थान पर चले जाते हैं और छुट्टी के समय वापस स्कूल पहुंचकर चेक-आउट करने की कोशिश करते हैं। कुछ मामलों में मोबाइल को स्कूल में छोड़कर लोकेशन के जरिए अपनी उपस्थिति प्रदर्शित करने की भी चर्चा है। हालांकि इन दावों की भी विभागीय जांच के बाद ही पुष्टि हो सकेगी।

    शिकायत के बाद फिर खोला गया स्कूल
    सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जब स्कूल के समय से पहले बंद होने की जानकारी विकासखंड शिक्षा अधिकारी को दी गई, उसके बाद स्कूल को दोबारा खोला गया। लेकिन तब तक बच्चे अपने घर जा चुके थे।
    ऐसे में सवाल उठता है कि स्कूल दोबारा खोलने का क्या औचित्य था? क्या बच्चे वापस स्कूल आकर पढ़ाई कर सकते थे? और यदि बच्चे वापस नहीं आए तो निर्धारित समय तक विद्यालय में शिक्षण कार्य कौन करता रहा?

    कसडोल की शिक्षा व्यवस्था पर लगातार उठ रहे सवाल
    कसडोल विकासखंड में शिक्षा व्यवस्था को लेकर पहले भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। स्कूलों में शिक्षकों की अनुपस्थिति, समय पर स्कूल नहीं खुलना, समय से पहले छुट्टी और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं।
    ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ शिक्षक अपनी पहुंच और रसूख के चलते विभागीय कार्रवाई से बच जाते हैं। वहीं कुछ मामलों में सरकारी वेतन लेने के बावजूद स्कूल में नियमित रूप से उपस्थित नहीं होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।
    हालांकि इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। यदि कहीं शिक्षक निर्धारित दायित्वों का पालन नहीं कर रहे हैं तो विभाग को शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।

    विधायक प्रतिनिधि ने कहा—लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी
    मामले को लेकर शिक्षा विभाग के विधायक प्रतिनिधि विजय साहू ने कहा कि इस तरह की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि स्कूल में समय से पहले छुट्टी किए जाने की जानकारी मिलने के बाद तत्काल विकासखंड शिक्षा अधिकारी को फोन कर मामले की जानकारी दी गई और जांच कर उचित कार्रवाई करने के लिए कहा गया है।

    BEO बोले—जांच के बाद होगी कार्रवाई
    इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी अरविंद ध्रुव ने बताया कि उन्हें मामले की जानकारी मिली है। उन्होंने कहा कि तत्काल जांच कराई जाएगी और यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
    अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले की जांच कितनी गंभीरता से करता है और यदि स्कूल समय से पहले बंद करने की शिकायत सही पाई जाती है तो संबंधित हेडमास्टर पर क्या कार्रवाई की जाती है।

    बड़ा सवाल यही है कि जिन नौनिहालों के भविष्य की जिम्मेदारी शिक्षकों के कंधों पर है, अगर उन्हीं की पढ़ाई के समय स्कूल बंद हो जाए तो आखिर बच्चों के भविष्य की जिम्मेदारी कौन लेगा?

    Hemant Baghel
    School closes before time; where do headmasters go after dismissing the children?
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