हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। वन परिक्षेत्र कोठारी क्षेत्र के ग्राम कोठारी एवं तालादबदर के ग्रामीणों ने दो अलग-अलग मामलों को लेकर कलेक्टर एवं वनमंडलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है।

एक ज्ञापन में हाथी एवं जंगली सुअर जैसे वन्यप्राणियों द्वारा फसल, मकान और जनहानि होने पर मिलने वाली क्षतिपूर्ति राशि में वृद्धि की मांग की गई है।

वहीं दूसरे ज्ञापन में वन परिक्षेत्र अधिकारी कोठारी जीवनलाल साहू पर पिछले आठ वर्षों से कथित अनियमितता, भाई-भतीजावाद, वित्तीय गड़बड़ी और स्थानांतरण नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए जांच एवं स्थानांतरण की मांग की गई है।

वन्यप्राणियों से फसल नुकसान, मुआवजा बढ़ाने की मांग
ग्रामीणों ने बताया कि कोठारी क्षेत्र के किसान मुख्य रूप से कृषि पर निर्भर हैं। क्षेत्र में हाथियों के दल और जंगली सुअरों के कारण किसानों की फसलों को लगातार नुकसान पहुंच रहा है। वन्यप्राणी खेतों में खड़ी फसलों को रौंदने और खाने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके अलावा मकान क्षतिग्रस्त होने तथा जनहानि का खतरा भी बना रहता है।
ग्रामीणों के अनुसार वर्तमान में एक हेक्टेयर धान की फसल तैयार करने में जुताई, बीज, खाद, कीटनाशक और मजदूरी सहित करीब 40 से 50 हजार रुपये की लागत आती है। इसके बावजूद हाथी से फसल नुकसान होने पर करीब 23,500 रुपये तथा जंगली सुअर से नुकसान होने पर 12,500 रुपये प्रति हेक्टेयर क्षतिपूर्ति मिलने की बात ग्रामीणों ने कही है।
ग्रामीणों ने कहा कि वर्तमान कृषि लागत और महंगाई को देखते हुए यह क्षतिपूर्ति राशि पर्याप्त नहीं है। उन्होंने फसल के साथ-साथ मकान क्षति और जनहानि के मामलों में भी मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की है। ज्ञापन में जनहानि होने पर वर्तमान में दी जाने वाली 6 लाख रुपये की सहायता राशि को भी बढ़ाने की मांग की गई है।
वन अधिकारी पर ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
दूसरे ज्ञापन में ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्र अधिकारी कोठारी जीवनलाल साहू की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे पिछले करीब आठ वर्षों से अधिकारी की कथित मनमानी और प्रशासनिक अनियमितताओं से परेशान हैं। ग्रामीणों ने दावा किया कि इस संबंध में पूर्व में भी संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के बजाय कथित तौर पर बाहरी लोगों तथा अधिकारी के सगे-संबंधियों एवं भतीजों को संविदा पदों पर नियुक्ति दी गई। साथ ही शासकीय आवास के उपयोग को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने गांव की सड़क मरम्मत, सफाई एवं तालाब गहरीकरण जैसे कार्यों की मांग को लेकर भी वन परिक्षेत्र अधिकारी पर उदासीनता का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि वन संरक्षण, दावानल नियंत्रण और जंगल की सुरक्षा में स्थानीय ग्रामीण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन रोजगार और विकास कार्यों में उन्हें अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिल रही है।
जांच और स्थानांतरण की मांग
ग्रामीणों ने दोनों मामलों में प्रशासन से गंभीरता से संज्ञान लेने की मांग की है। वन परिक्षेत्र अधिकारी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच कराए जाने तथा जांच पूरी होने तक आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की गई है। साथ ही ग्रामीणों ने वन परिक्षेत्र अधिकारी जीवनलाल साहू का स्थानांतरण किए जाने की मांग भी ज्ञापन के माध्यम से की है।
अब देखना होगा कि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों और मुआवजा बढ़ाने की मांग पर जिला प्रशासन एवं वन विभाग की ओर से क्या कार्रवाई की जाती है।










































