गोवर्धन यदु
तिल्दा-नेवरा। नगर पालिका परिषद तिल्दा-नेवरा के वार्ड क्रमांक-19 पुरानी बस्ती स्थित मां मावली मंदिर तथा सासाहोली के गांधी चौक में हलषष्ठी पर्व के अवसर पर विशेष पूजा स्थलों की स्थापना की गई। यहां पुरोहितों द्वारा व्रती महिलाओं को हलषष्ठी माता की व्रत कथा सुनाई गई। कथा के पश्चात महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आरती उतारी और अपनी संतानों की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य एवं सुख-समृद्धि की कामना की।

सगरी के पास बैल, शिवलिंग और गौरी-गणेश की स्थापना
हलषष्ठी पूजा के लिए पारंपरिक रूप से सगरी का निर्माण किया गया, जिसे कांशी के फूलों से आकर्षक रूप से सजाया गया। पूजा स्थल पर मिट्टी से निर्मित बैल, शिवलिंग तथा गौरी-गणेश की स्थापना कर विधिवत पूजा-अर्चना की गई। व्रती महिलाओं ने हलषष्ठी माता का स्मरण करते हुए अपनी संतानों के उज्ज्वल भविष्य और दीर्घायु की प्रार्थना की।
बारिश में भी जारी रही पूजा-अर्चना
पूजा के दौरान बारिश होने के बावजूद महिलाओं की आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं आई। कई महिलाएं छाता लेकर पूजा स्थल तक पहुंचीं और बारिश की फुहारों के बीच पूरे भक्तिभाव से पूजा-अर्चना करती नजर आईं। मौसम सुहाना होने के कारण ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में भी हलषष्ठी पर्व को लेकर उत्साह का माहौल देखने को मिला।

हल से जुते खेत का अन्न ग्रहण नहीं करने की मान्यता
हलषष्ठी पर्व से जुड़ी मान्यता के अनुसार इस दिन व्रती महिलाएं हल से जुते खेत में पैदा हुए अनाज का सेवन नहीं करती हैं। पूजा-अर्चना के बाद महिलाओं ने पारंपरिक रूप से पसहर चावल और छह प्रकार की भाजियों का प्रसाद ग्रहण किया।

पूजा के समापन के बाद माताओं ने अपने बच्चों की पीठ पर पीली पोती लगाकर तिलक किया। इस दौरान उन्होंने संतानों की लंबी आयु, सुखी, स्वस्थ एवं समृद्ध जीवन की कामना की। हलषष्ठी पर्व पर क्षेत्र में पारंपरिक रीति-रिवाजों और श्रद्धा का विशेष वातावरण देखने को मिला।










































