हेमंत बघेल
कसडोल। कसडोल मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर जनपद पंचायत कसडोल अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमरिया के आश्रित ग्राम मालीडीह में डीएमएफ मद से स्वीकृत सीसी रोड निर्माण कार्य में अनियमितता और भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि लगभग 5 लाख रुपये की लागत से कराए जा रहे निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई तथा निम्नस्तरीय सामग्री का उपयोग किया गया।

जानकारी के अनुसार, निर्माण कार्य के दौरान सरपंच वीरेंद्र साहू के पिता एवं शासकीय विद्यालय में पदस्थ प्रधानपाठक सम्मेलाल साहू स्वयं मौके पर खड़े होकर कार्य का संचालन करते दिखाई दिए। ग्रामीणों का आरोप है कि सीसी रोड निर्माण में मानक के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया और कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मामले की जानकारी मिलने पर जनपद पंचायत कसडोल के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) कमलेश साहू ने निर्माण कार्य पर रोक लगाते हुए सरपंच एवं सचिव को दो दिवस के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी किया था। हालांकि नोटिस के बाद प्रस्तुत जवाब और उसके आधार पर की गई कार्रवाई को लेकर अब तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से सीईओ से मामले की जांच और कार्रवाई की जानकारी लेने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ रही है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य में वास्तव में अनियमितता पाई गई है तो केवल सरपंच और सचिव ही नहीं, बल्कि संबंधित तकनीकी अधिकारियों एवं जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। वहीं कुछ ग्रामीणों ने पंचायत कार्यों में कथित कमीशनखोरी के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दूसरी ओर, शासकीय कर्मचारी होने के बावजूद प्रधानपाठक सम्मेलाल साहू द्वारा पंचायत के निर्माण कार्यों में कथित हस्तक्षेप को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत के कार्यों की जिम्मेदारी निर्वाचित सरपंच की होती है, ऐसे में किसी अन्य व्यक्ति की सक्रिय भूमिका जांच का विषय है।
इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी अरविंद ध्रुव ने प्रधानपाठक सम्मेलाल साहू के विरुद्ध जांच एवं आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि एक सप्ताह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने तथा निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने की मांग की है।




