गोवर्धन यदु
तिल्दा-नेवरा। से लगे ग्राम पंचायत बिलाड़ी में मुरूम के कथित अवैध खनन को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि संतोषी बांध क्षेत्र में पंचायत से जुड़े कुछ प्रभावशाली लोगों की कथित मिलीभगत से जेसीबी मशीनों और भारी वाहनों के जरिए बड़े पैमाने पर मुरूम निकाला जा रहा है। आरोप है कि इस मुरूम को तिल्दा-नेवरा सहित आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों और कॉलोनियों में 3000 से 5000 रुपये प्रति ट्रिप तक बेचा जा रहा है।

बिना अनुमति खनन का आरोप, लाखों के राजस्व नुकसान की आशंका
ग्रामीणों के मुताबिक यदि मुरूम का उत्खनन बिना वैध अनुमति और रॉयल्टी के किया जा रहा है, तो इससे शासन को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है। वहीं लगातार मशीनों से खुदाई किए जाने के कारण क्षेत्र में गहरे गड्ढे बनते जा रहे हैं, जिससे बरसात के दौरान हादसे का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि खनन के कारण खेतों तक पहुंचने वाले रास्ते भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। भारी वाहनों की आवाजाही से ग्रामीणों और किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने पर्यावरण को होने वाले नुकसान को लेकर भी चिंता जताई है।
शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ग्रामीणों की शिकायतें सही हैं तो अब तक मौके पर प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित अधिकारियों को मामले की जानकारी और शिकायत दिए जाने के बावजूद अवैध खनन पर रोक नहीं लग सकी है। यही वजह है कि अब ग्रामीण संरक्षण और मिलीभगत के आरोप भी लगा रहे हैं।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। पूरे मामले की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
सरपंच ने कहा—मैंने शिकायत कर दी, आगे कार्रवाई प्रशासन का काम
मामले में ग्राम पंचायत बिलाड़ी के सरपंच से फोन पर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया। सरपंच ने बताया कि उनके द्वारा तहसील कार्यालय और अनुविभागीय अधिकारी कार्यालय में शिकायत की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि शिकायत के बाद भी यदि मुरूम का अवैध खनन नहीं रुक रहा है या कार्रवाई नहीं हो रही है, तो इसके संबंध में वे कुछ नहीं कह सकते।
तहसीलदार ने दिया कार्रवाई का भरोसा
वहीं मामले को लेकर तिल्दा तहसीलदार से भी शिकायत की गई है। तहसीलदार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्परता से संज्ञान लेने और दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई किए जाने की बात कही है।
अब देखना होगा—कब थमेगा कथित अवैध खनन?
फिलहाल ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है। ग्रामीणों ने मांग की है कि संतोषी बांध क्षेत्र में तत्काल जांच कराई जाए, खनन की अनुमति और रॉयल्टी की जांच हो, निकाले गए मुरूम की मात्रा का आकलन किया जाए और यदि अवैध खनन की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के साथ शासन को हुए राजस्व नुकसान की वसूली की जाए।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
अब सवाल सिर्फ मुरूम की खुदाई का नहीं, बल्कि यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह कथित खेल चल रहा है और शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो पा रही है? प्रशासन की जांच के बाद ही पूरे मामले की तस्वीर साफ होगी।










































