हेमंत बघेल
बिलासपुर। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज राम गोपाल गर्ग ने 7 अगस्त 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘सशक्त’ ऐप की रेंज स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में रेंज के विभिन्न जिलों के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक/पुलिस अधीक्षक, एएसपी, डीएसपी, थाना प्रभारी और नवपदस्थ प्रशिक्षु उप निरीक्षक शामिल हुए।

बैठक का मुख्य उद्देश्य दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों की चोरी पर प्रभावी अंकुश लगाना, संदिग्ध वाहनों की त्वरित पहचान और ट्रैकिंग करना तथा चोरी हुए वाहनों की रिकवरी दर को बढ़ाना रहा।
एक सप्ताह में डेटा और बैकलॉग पूरा करने के निर्देश
आईजी ने वाहन चोरी के प्रकरणों में अधूरे डेटा को तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। जिन मामलों में चेसिस अथवा इंजन नंबर दर्ज नहीं हैं, उन्हें वाहन पोर्टल के माध्यम से निर्धारित समय में अपडेट करने को कहा गया। एफआईआर दर्ज होते ही वाहन का पूरा विवरण ‘सशक्त’ ऐप में दर्ज करने और यथासंभव एफआईआर में इंजन एवं चेसिस नंबर स्पष्ट रूप से दर्ज करने के निर्देश दिए गए।

रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और बाजारों में बढ़ेगी चेकिंग
सार्वजनिक और संवेदनशील पार्किंग स्थलों पर ‘सशक्त’ ऐप के माध्यम से चेकिंग अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, बाजार, सराफा क्षेत्र और सार्वजनिक पार्किंग स्थलों को विशेष रूप से चेक करने पर जोर दिया गया। पार्किंग ठेकेदारों और कर्मचारियों को भी ऐप से जोड़कर चेकिंग अभियान में शामिल करने की बात कही गई।
नए पुलिस अधिकारियों को रोजाना 20 संदिग्ध वाहनों की जांच का लक्ष्य
नवपदस्थ डीएसपी, निरीक्षक, उप निरीक्षक एवं अन्य पुलिस कर्मचारियों का ‘सशक्त’ ऐप पर शत-प्रतिशत पंजीयन कराने के निर्देश दिए गए। नए यूजर्स को व्यावहारिक अभ्यास के लिए प्रतिदिन कम से कम 20 संदिग्ध वाहनों की जांच करने का लक्ष्य भी दिया गया है।
बरामद अथवा रिकवर किए गए वाहनों का बैक-एंड डेटा तत्काल अपडेट करने के निर्देश दिए गए, ताकि रिकॉर्ड में दोहराव न हो और वाहन मालिकों को सुपुर्दगी की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।
साइबर फ्रॉड पीड़ितों की राशि वापसी पर MRM का लाइव प्रेजेंटेशन
बैठक के दौरान मुंगेली एसपी भोजराम पटेल ने साइबर अपराध के पीड़ितों की राशि वापस दिलाने के लिए अपनाए जा रहे मनी रिकवरी मैकेनिज्म (MRM) का लाइव प्रेजेंटेशन दिया।
उन्होंने बताया कि साइबर हेल्पलाइन 1930 और संबंधित पोर्टल के माध्यम से शिकायत प्राप्त होते ही पुलिस द्वारा त्वरित कार्रवाई कर साइबर अपराधियों के बैंक खातों में गई राशि को होल्ड/फ्रीज कराने का प्रयास किया जाता है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी कर होल्ड की गई राशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस दिलाने की कार्रवाई की जाती है।
एसपी भोजराम पटेल ने साइबर फ्रॉड के मामलों में शुरुआती 1 से 2 घंटे को ‘गोल्डन आवर’ बताते हुए लोगों से अपील की कि ठगी का पता चलते ही बिना देरी किए 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं, ताकि रकम को सुरक्षित रूप से होल्ड कराने की संभावना बढ़ सके।
IG ने कहा—तकनीक आधारित पुलिसिंग को दें सर्वोच्च प्राथमिकता
आईजी राम गोपाल गर्ग ने अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से पारदर्शी और परिणाममूलक पुलिसिंग सुनिश्चित करना बैठक का मुख्य उद्देश्य है। उन्होंने ‘सशक्त’ ऐप को चोरी के वाहनों की पहचान और अपराधियों तक पहुंचने में महत्वपूर्ण टूल बताते हुए इसके शत-प्रतिशत क्रियान्वयन पर जोर दिया।
आईजी ने सभी अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने और लंबित प्रकरणों को कम करते हुए आम जनता को पुलिसिंग का सीधा लाभ पहुंचाने की हिदायत दी।










































