हेमंत बघेल
जांजगीर-चांपा। साइबर अपराधियों द्वारा दूसरों के बैंक खातों का इस्तेमाल कर देशभर में साइबर ठगी की रकम का लेनदेन करने वाले म्यूल अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने मामले में 5 म्यूल खाता धारकों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है।

पुलिस के अनुसार, भारत सरकार के गृह मंत्रालय की गाइडलाइन और पुलिस मुख्यालय रायपुर के निर्देशों के तहत यह कार्रवाई की गई। जांच के दौरान समन्वय पोर्टल से प्राप्त इनपुट, तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रांजेक्शन की गहन जांच की गई। जांच में आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए बैंक खाते देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 33 साइबर फ्रॉड प्रकरणों से जुड़े पाए गए।

इन 33 मामलों में कुल लगभग 10 करोड़ 18 लाख 19 हजार 809 रुपये की साइबर ठगी सामने आई है। वहीं, इन मामलों से संबंधित करीब 66 लाख 557 रुपये की राशि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए म्यूल खातों में ट्रांसफर होना पाया गया।
11 राज्यों में दर्ज मिले 33 साइबर फ्रॉड के मामले
पुलिस जांच में आरोपियों के बैंक खातों का संबंध देश के 11 राज्यों में दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों से सामने आया है। इनमें आंध्र प्रदेश के 4, गोवा के 2, गुजरात के 5, हिमाचल प्रदेश के 2, कर्नाटक के 6, महाराष्ट्र के 3, राजस्थान के 2, तेलंगाना के 4, उत्तर प्रदेश के 2, पश्चिम बंगाल के 1 और छत्तीसगढ़ के 2 मामले शामिल हैं।
कमीशन के लालच में खुलवाए बैंक खाते
जांच में सामने आया कि आरोपी कमीशन और आर्थिक लालच में अपने नाम से बैंक खाते खुलवाते थे तथा उन्हीं खातों से जुड़े सिम नंबर भी चालू करवाकर साइबर अपराधियों को उपलब्ध कराते थे। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने और उसे आगे अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था।
पूछताछ में आरोपी तुषार सिंह राठौर, ओम प्रकाश केंवट और सत्यनारायण आदित्य ने पुलिस को बताया कि संदीप चंद्रा और उसके साथियों द्वारा कमीशन का लालच देकर उनसे बैंक खाते खुलवाए गए थे। मोबाइल नंबर चालू करवाने के बाद बैंक खातों को अपने साथ ले लिया गया था। इसके बदले खाताधारकों को कई हजार रुपये से लेकर लाखों रुपये तक कमीशन मिलने की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार, संदीप चंद्रा वर्तमान में बिलासपुर रेंज के रेंज साइबर थाना में दर्ज साइबर फ्रॉड के एक मामले में केंद्रीय जेल में निरुद्ध है।
इन आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
सत्यनारायण आदित्य, पिता राम कुमार आदित्य, निवासी ग्राम किकिरदा, थाना बिर्रा, जिला जांजगीर-चांपा।
तुषार सिंह राठौर, पिता अशोक राठौर, निवासी ग्राम फरसवानी, थाना उरगा, जिला कोरबा।
हरिश कुमार देवांगन, पिता स्व. राम सुंदर देवांगन, निवासी सिवनी, थाना चांपा, जिला जांजगीर-चांपा।
ओम प्रकाश केंवट, पिता स्व. राम किशुन केंवट, निवासी फरसवानी, थाना उरगा, जिला कोरबा।
मनोज कुमार मांझी, पिता फिरंगी मांझी, निवासी चांपा, थाना चांपा, जिला जांजगीर-चांपा।
आरोपियों के विरुद्ध साइबर थाना जांजगीर-चांपा में अपराध क्रमांक 06/2026 के तहत धारा 61(2), 317(4), 317(5), 318(4) एवं 323 बीएनएस में अपराध दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की गई है।
क्या होता है म्यूल अकाउंट?
म्यूल अकाउंट ऐसा बैंक खाता होता है, जिसे कोई व्यक्ति कमीशन या आर्थिक लाभ के लालच में साइबर अपराधियों को इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कराता है। साइबर ठग इन खातों में ठगी की रकम मंगवाकर उसे आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर करते हैं, जिससे वास्तविक अपराधियों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराध में अपने बैंक खाते का उपयोग करने की अनुमति देना या बैंक खाता उपलब्ध कराना भी गंभीर अपराध है। खाताधारक की भूमिका और संलिप्तता पाए जाने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
साइबर थाना की आमजन से अपील
साइबर थाना जांजगीर-चांपा ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, सिम कार्ड, ओटीपी, पासवर्ड या इंटरनेट बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं।
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी होती है तो तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करने और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की गई है। पुलिस के मुताबिक, समय पर सूचना मिलने से ठगी की राशि को होल्ड कराने या वापस दिलाने की संभावना बढ़ जाती है।
इस पूरी कार्रवाई में निरीक्षक भास्कर शर्मा, प्रभारी साइबर थाना जांजगीर-चांपा, सउनि विवेक सिंह, आरक्षक प्रदीप दुबे, चिरंजीव कुमार सहित साइबर थाना टीम का सराहनीय योगदान रहा।
पुलिस ने बताया कि मामले में आगे की विवेचना जारी है और अन्य संभावित आरोपियों के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। प्रकरण में और गिरफ्तारियां होने की संभावना है।










































