15 किलोमीटर दूर उपलब्ध फ्लाई ऐश ईंट के बावजूद लाल ईंट का इस्तेमाल, सरपंच और तकनीकी सहायक की भूमिका पर ग्रामीणों ने उठाए सवाल; जांच के आश्वासन के बाद भी कई दिन से कार्रवाई का इंतजार
हेमंत बघेल
बलौदबाजार। जिले के जनपद पंचायत कसडोल के वनांचल क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलारी ज में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) एवं 15वें वित्त की राशि से निर्माणाधीन आंगनबाड़ी भवन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। करीब 9.68 लाख रुपये की लागत से बन रहे इस भवन में निर्माण मापदंडों की अनदेखी करते हुए लाल ईंट के इस्तेमाल का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है।

ग्रामीणों का कहना है कि शासकीय भवन निर्माण में निर्धारित तकनीकी मापदंड और गुणवत्ता का पालन किया जाना चाहिए। इसके बावजूद निर्माण स्थल पर लाल ईंट का उपयोग किया जा रहा है। ग्रामीणों ने निर्माण में उपयोग की जा रही सामग्री की गुणवत्ता और मात्रा को लेकर भी सवाल उठाते हुए पूरे मामले की तकनीकी जांच की मांग की है।

15 किलोमीटर दूर फ्लाई ऐश ईंट उपलब्ध, फिर लाल ईंट क्यों?
ग्रामीणों के अनुसार बेलारी ज से करीब 15 किलोमीटर की दूरी पर सालिया गांव में फ्लाई ऐश ईंट का निर्माण होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निर्माण सामग्री उपलब्ध है, तो आंगनबाड़ी भवन के निर्माण में लाल ईंट का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है?
ग्रामीणों का आरोप है कि वनांचल क्षेत्र और दूरस्थ गांव होने का फायदा उठाकर निर्माण कार्य में मनमानी की जा रही है। हालांकि लाल ईंट के इस्तेमाल और इससे जुड़े तकनीकी एवं शासकीय नियमों की वास्तविक स्थिति संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

9.68 लाख रुपये की लागत से बन रहा भवन
उपलब्ध निर्माण विवरण के अनुसार आंगनबाड़ी भवन के लिए राशि इस प्रकार निर्धारित है—
मनरेगा मजदूरी: ₹0.97 लाख
मनरेगा सामग्री: ₹7.02 लाख
15वें वित्त की राशि: ₹1.69 लाख
कुल स्वीकृत लागत: ₹9.68 लाख

इतनी बड़ी शासकीय राशि से बनने वाले भवन में गुणवत्ता से किसी भी तरह का समझौता नहीं होना चाहिए। ग्रामीणों ने निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की वास्तविक मात्रा, गुणवत्ता और भुगतान अभिलेखों की जांच कराने की मांग की है।
तकनीकी निरीक्षण पर भी उठे सवाल
निर्माण कार्य की निगरानी और तकनीकी निरीक्षण को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार जनपद पंचायत कसडोल में पदस्थ तकनीकी सहायक मंदीप लहरे द्वारा निर्माण स्थल का नियमित निरीक्षण नहीं किया गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि जब तकनीकी सहायक से लाल ईंट के इस्तेमाल को लेकर जानकारी मांगी गई तो निर्माण कार्य पूरा होने की बात कही गई। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि भवन में अभी भी कई कार्य अधूरे हैं, जिनमें शौचालय, विद्युत वायरिंग, दरवाजे और खिड़कियों सहित अन्य कार्य शामिल हैं।
ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि भवन अभी पूर्ण नहीं हुआ है तो निर्माण कार्य को पूर्ण बताए जाने की स्थिति कैसे बनी और तकनीकी निरीक्षण किस स्तर पर किया गया?
पुराने निर्देशों के बावजूद लाल ईंट के इस्तेमाल का आरोप
ग्रामीणों का दावा है कि वर्ष 2018-19 में तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ द्वारा ग्राम पंचायतों को निर्माण कार्यों में लाल ईंट के इस्तेमाल को लेकर निर्देश जारी किए गए थे तथा नियमों का उल्लंघन होने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई थी।
यदि वर्तमान निर्माण में भी निर्धारित नियमों के विपरीत लाल ईंट का इस्तेमाल किया गया है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा समय रहते निर्माण स्थल का निरीक्षण क्यों नहीं किया गया? यह सवाल भी अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
CEO के जांच के आश्वासन के बाद भी कार्रवाई का इंतजार
मामले को लेकर जनपद पंचायत कसडोल के सीईओ कमलेश साहू ने जांच कराने की बात कही थी। लेकिन ग्रामीणों के अनुसार जांच के आश्वासन के कई दिन बाद भी अब तक मौके पर जांच नहीं हो सकी है।
वहीं, ग्रामीणों का कहना है कि सीईओ द्वारा लाल ईंट को मजबूती के लिहाज से बेहतर बताए जाने संबंधी बात भी कही गई है। ऐसे में सवाल यह है कि यदि किसी शासकीय निर्माण में किसी विशेष सामग्री के इस्तेमाल को लेकर विभागीय नियम या तकनीकी निर्देश लागू हैं, तो क्या केवल मजबूती का तर्क उन नियमों की जगह ले सकता है?
यही वजह है कि ग्रामीण अब केवल निर्माण सामग्री ही नहीं, बल्कि पूरे निगरानी तंत्र की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं।
सरपंच से लेकर तकनीकी अमले तक, किसकी कितनी जिम्मेदारी?
शासकीय निर्माण कार्य में ग्राम पंचायत स्तर से लेकर तकनीकी निरीक्षण और जनपद पंचायत स्तर तक अलग-अलग जिम्मेदारियां निर्धारित होती हैं। ऐसे में यदि निर्माण कार्य में वास्तव में नियमों का उल्लंघन हुआ है, तो यह जांच का विषय है कि इसकी जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी।
क्या निर्माण कार्य की निगरानी ग्राम पंचायत स्तर पर नहीं हुई?
क्या तकनीकी सहायक ने नियमित निरीक्षण किया?
क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की गई?
क्या माप पुस्तिका (MB) में वास्तविक कार्य के अनुरूप प्रविष्टियां की गईं?
और क्या जनपद पंचायत स्तर से निर्माण की नियमित मॉनिटरिंग हुई?
इन सवालों का जवाब निष्पक्ष जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
बच्चों के भविष्य से जुड़ा भवन, गुणवत्ता से समझौता क्यों?
आंगनबाड़ी भवन सीधे छोटे बच्चों से जुड़ा सार्वजनिक भवन है। ऐसे भवन के निर्माण में मजबूती, गुणवत्ता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
यदि जांच में निर्माण मापदंडों की अनदेखी, घटिया सामग्री का इस्तेमाल या स्वीकृत मात्रा से कम सामग्री लगाए जाने की पुष्टि होती है, तो यह केवल सरकारी राशि से जुड़ा मामला नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों की सुरक्षा से भी जुड़ा गंभीर विषय होगा।
जांच में किन बिंदुओं को शामिल करने की जरूरत?
ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच की मांग की है। जांच में मुख्य रूप से—
निर्माण में इस्तेमाल ईंट की गुणवत्ता और प्रकार की जांच।
स्वीकृत एस्टीमेट और वास्तविक निर्माण कार्य का मिलान।
माप पुस्तिका (MB) की जांच।
सामग्री एवं मजदूरी भुगतान अभिलेखों की जांच।
स्वीकृति आदेश और तकनीकी स्वीकृति की जांच।
निर्माण स्थल के निरीक्षण की तारीख और रिपोर्ट की जांच।
निर्माण कार्य की वास्तविक प्रगति का भौतिक सत्यापन।
निर्माण में निर्धारित मापदंडों का पालन हुआ या नहीं, इसकी जांच।
शामिल किए जाने की मांग की जा रही है।
बड़ा सवाल: वनांचल क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की निगरानी कौन करेगा?
बेलारी ज का मामला अब केवल एक आंगनबाड़ी भवन तक सीमित नहीं रह गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों में होने वाले कई शासकीय निर्माण कार्यों में निगरानी कमजोर रहती है। यदि यह आरोप सही है तो यह संबंधित विभाग के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
शासकीय योजनाओं की राशि जनता के टैक्स और सरकारी बजट से आती है। इसलिए निर्माण कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता की शिकायत सामने आने पर पारदर्शी जांच होना जरूरी है।
फिलहाल ग्रामीणों को सीईओ द्वारा किए गए जांच के आश्वासन के बाद कार्रवाई का इंतजार है। जांच में यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई होगी या मामला सिर्फ आश्वासन तक सीमित रहेगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
इस मामले को लेकर ग्राम पंचायत बिलारी ज के सरपंच वीरेंद्र कुमार साहू से 4 दिनों से लगातार संपर्क किया गया मगर सरपंच के द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया, सरपंच के पक्ष जानने के बाद खबर प्रमुखता से चलाई जाएगी।










































