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    महानदी बनी सोने का अंडा देने वाली मुर्गी, 24 घंटे लूटी जा रही महानदी की आबरू

    Hemant BaghelBy Hemant BaghelOctober 31, 20260106 Mins Read
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    हेमंत बघेल 

    बलौदाबाजार। जिले में महानदी रेत माफियाओं के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी बन गई है। क्योंकि यहां 24 घंटे रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन जारी है। जिला मुख्यालय से तकरीबन 26 किलोमीटर दूर स्थित महानदी रेत माफियाओं का ऐसा साम्राज्य बन गई है, जहां न प्रशासन का डर है और न ही कायदे-कानून का। रेत माफियाओं का मायाजाल इस कदर फैला हुआ है कि चप्पे-चप्पे पर मुखबिर पहरा देते हैं। जैसे ही प्रशासन की गाड़ियां महानदी की ओर बढ़ती हैं, वैसे ही पुलिस के सायरन की तरह फोन की सूचना सभी रेत माफियाओं तक पहुंच जाती है। इसके बाद रेत माफिया ट्रैक्टर या हाइवा लेकर मौके से चंपत हो जाते हैं।

    इन गांवों में धड़ल्ले से हो रहा रेत का अवैध उत्खनन

    बात करें तो तूरमा, हरदी, सिंगारी, परसापाली, लाटा, सीरियाडीह, चांटीपाली, दर्रा, मोहतरा, सिनोधा, खैरा और पीकरी जैसे तमाम गांवों से रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। इन सबमें एक ऐसा घाट है, परसापाली, जो बीते कई वर्षों से सुर्खियों में है। क्योंकि यहां बिना घाट स्वीकृत हुए बीते 7-8 सालों से लगातार अवैध उत्खनन किया जा रहा है। करोड़ों रुपये कमाए जा रहे हैं, मगर खनिज विभाग की नजर इतनी कमजोर कैसे हो गई कि कोई व्यक्ति बिना घाट स्वीकृत हुए इतने वर्षों से खनन कर रहा है, या फिर इसे जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है?

    स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि खनिज विभाग कभी-कभार ट्रैक्टरों पर कार्रवाई तो करता है, मगर परसापाली में कार्रवाई न होना खनिज विभाग के सफेद कपड़ों पर कीचड़ भरा दाग जरूर लगा रहा है। बड़ी बात तो यह है कि जिस रेत माफिया ने परसापाली में कई वर्षों से अपना साम्राज्य खड़ा कर रेत का गोरखधंधा चला रखा है और महानदी की आबरू के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहा है, वह अक्सर खनिज विभाग के दफ्तर के बाहर बैठा दिखाई देता है।

    ऐसे रेत माफिया शासन-प्रशासन को अपनी बपौती समझते हैं और खनिज विभाग के अधिकारियों को अपनी उंगलियों पर नचाते हैं। तभी तो बेखौफ होकर जिला खनिज अधिकारी कार्यालय के बाहर बैठे दिखाई देते हैं। खास बात तो यह है कि जिस रेत माफिया की बात की जा रही है, उसके पास खुद की चैन माउंटेन, जेसीबी मशीन, हाइवा और ट्रैक्टर मौजूद हैं। सूत्रों की मानें तो इस रेत माफिया के पास सालों पहले कुछ नहीं था, मगर जब से चोरी की रेत बेचकर कमाई शुरू की, तब से गाड़ी और पैसा इतना अर्जित कर लिया कि प्रशासन भी उसके ऊपर कार्रवाई करने से कतराता है।

    शाम होते ही महानदी और जोक नदी में सज जाता है अवैध उत्खनन का बाजार

    इसी तरह महानदी और जोक नदी से शाम होते ही अलग-अलग घाटों पर सैकड़ों ट्रैक्टर लग जाते हैं और रातभर महानदी की आबरू लूटी जाती है। रेत माफिया इतने चतुर हैं कि जब तक घाट में गाड़ियां लगी रहती हैं, तब तक पहरा देते हैं। कसडोल की बात करें तो पुराने नाका, दर्रा स्वागत गेट, गोरधा, मोहतरा मोड़ और कसडोल घासीदास चौक जैसी जगहों पर रात से सुबह तक पहरेदारी की जाती है।

    इसके चलते कभी-कभार शिकायत मिलने पर अधिकारी मौके पर पहुंचते भी हैं तो पहले ही सूचना दे दी जाती है, जिसके चलते घाट से ट्रैक्टर लेकर रेत माफिया रफूचक्कर हो जाते हैं। सूत्रों का कहना है कि ट्रैक्टर चालकों का एक व्हाट्सएप ग्रुप भी बना हुआ है, जिसमें 24 घंटे संदेशों का आदान-प्रदान होता रहता है। इसी के चलते बेखौफ होकर रेत का अवैध उत्खनन जारी है।

    शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं, विभाग एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी

    स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि जब रेत के अवैध उत्खनन की जानकारी जिला खनिज अधिकारी अवधेश बारिक को दी जाती है तो उनके द्वारा स्टाफ की कमी होने का हवाला दिया जाता है या सुबह दबिश देने का आश्वासन दिया जाता है। जब तहसीलदार को फोन किया जाता है तो वे खनिज अधिकारी को फोन लगाने की बात कहते हैं और खनिज अधिकारी तहसीलदार को फोन लगाने की बात कहते हैं। इसके चलते न समय पर खनिज विभाग की टीम पहुंचती है और न ही तहसीलदार की टीम।

    ऐसे में यदि महानदी में रेत का अवैध उत्खनन नहीं रोका गया तो एक दिन मुट्ठी भर रेत भी नहीं बचेगी, जिसकी जिम्मेदारी केवल खनिज विभाग की होगी। जिस तरह दिन-रात महानदी और जोक नदी से अवैध उत्खनन किया जा रहा है, उससे शासन को करोड़ों रुपये के राजस्व की हानि हो रही है। यदि स्वीकृत घाट नियमों के अनुसार संचालित हों तो शासन को करोड़ों रुपये का राजस्व मिल सकता है, मगर यहां चोर-चोर मौसेरे भाई वाली स्थिति बनी हुई है, जिससे शासन को नुकसान होना लाजमी है।

    स्वीकृत घाट में भी नियमों की अनदेखी, चैन माउंटेन से हो रहा खनन

    सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार खैरा-कटगी घाट स्वीकृत हुआ है, लेकिन यहां भी नियमों को दरकिनार कर खनन किए जाने के आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाट में 24 घंटे चैन माउंटेन जेसीबी मशीन के माध्यम से रेत का खनन किया जा रहा है, जबकि नियमानुसार सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक ही खनन की अनुमति होती है।

    वहीं रेत घाट में स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मैनुअल तरीके से खनन और लोडिंग का प्रावधान है, लेकिन यहां मशीनों के उपयोग से स्थानीय मजदूरों के रोजगार पर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घाट संचालक उन्हें काम देने के बजाय चैन माउंटेन जेसीबी मशीन से खनन करवा रहे हैं।

    ग्रामीणों का कहना है कि जिन्हें घाट आवंटित हुआ है, उनका जोक नदी और स्थानीय लोगों के हितों से कोई सरोकार नहीं है। उनका उद्देश्य केवल रेत का खनन कर पैसा कमाना और यहां से चले जाना है। स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं मिलने से उनमें नाराजगी बढ़ती जा रही है।

    खनिज नियमों के अनुसार रेत घाटों में मैनुअल तरीके से खनन किए जाने का उद्देश्य स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और शासन को राजस्व प्राप्त कराना है। लेकिन खैरा-कटगी घाट में मशीनों के उपयोग और कथित तौर पर 24 घंटे खनन किए जाने के आरोपों ने खनिज विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग को घाट में चल रही गतिविधियों की जानकारी नहीं है? क्या खनिज विभाग और पर्यावरण विभाग द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है? स्थानीय लोगों का आरोप है कि घाट में पर्यावरण संरक्षण और एनजीटी के दिशा-निर्देशों की भी अनदेखी की जा रही है। अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं और नियमों के विपरीत खनन के आरोपों की जांच कर क्या कार्रवाई करते हैं।

    क्या जिला खनिज अधिकारी की खुलेगी नींद?

    अब देखना यह होगा कि महानदी और जोक नदी में लगातार हो रहे अवैध उत्खनन को लेकर जिला खनिज अधिकारी अवधेश बारिक की आंखें खुलती हैं या रोजाना की तरह बंद रहती हैं। परसापाली सहित क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित घाटों पर विभाग क्या कार्रवाई करता है, यह देखने वाली बात होगी।

    Hemant Baghel
    The Mahanadi has become a 'goose that lays the golden eggs'; its integrity is being plundered 24 hours a day.
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