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    “सीरियाडीह में 84 क्वांटल पीडीएस चावल गमन का मामला, गरीबों के हक पर डाका या सिस्टम की लापरवाही?”

    Hemant BaghelBy Hemant BaghelApril 15, 2026014 Mins Read
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    हेमंत बघेल 

    बलौदाबाजार। सीरियाडीह की शासकीय उचित मूल्य दुकान में 84 क्विंटल पीडीएस चावल गमन का मामला अब बड़ा घोटाला बनता जा रहा है।गरीबों को बांटे जाने वाले सरकारी राशन का 84 क्विंटल चावल रिकॉर्ड से गायब हो गया, लेकिन हैरानी की बात यह है कि जिम्मेदार विभाग और सोसाइटी के पदाधिकारी अब तक सिर्फ एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आ रहे हैं।

    सूत्रों के अनुसार इस दुकान में पदस्थ विक्रेता गौरी शंकर साहू पर चावल गमन करने का आरोप है। बताया जा रहा है कि विगत कई महीनों से इस शासकीय राशन दुकान में चावल गमन का खेल खेला जा रहा था,लेकिन मार्च महीने में जब स्टॉक मिलान किया गया तो 84 क्विंटल चावल कम पाया गया। इतना बड़ा अंतर सामने आने के बाद गांव में हड़कंप मच गया।

    सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या कोई एक सेल्समैन अकेले 84 क्विंटल चावल गायब कर सकता है? 84 क्विंटल यानी लगभग 168 बोरी चावल। इतनी बड़ी मात्रा को बिना किसी की जानकारी के दुकान से बाहर ले जाना आसान नहीं माना जा रहा। स्थानीय लोगों और सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले में केवल विक्रेता ही नहीं, बल्कि सोसाइटी के कुछ जिम्मेदार लोग भी शक के घेरे में हैं। लोगों का आरोप है कि यदि सोसाइटी अध्यक्ष गोविंद पटेल और जिम्मेदार पदाधिकारियों की निगरानी सही होती तो इतना बड़ा गमन संभव नहीं था।

    ग्रामीणों का कहना है कि जब गरीब परिवार हर महीने राशन दुकान के सामने लाइन में लगकर अपने हिस्से का चावल लेते हैं, तब किसी को कुछ किलो चावल कम भी मिलता है तो विवाद हो जाता है। ऐसे में 84 क्विंटल चावल गायब हो जाए और किसी को भनक तक न लगे, यह बात लोगों के गले नहीं उतर रही।

    मामले में खाद्य निरीक्षक कमल साहू ने भी स्वीकार किया है कि चावल गमन की जानकारी विभाग को मिल चुकी है। लेकिन सवाल यह है कि जब विभाग को जानकारी है, तो फिर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? अभी तक न तो विक्रेता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है और न ही किसी अधिकारी या पदाधिकारी की जिम्मेदारी तय की गई है। सिर्फ जांच की बात कहकर मामले को शांत करने की कोशिश की जा रही है।

    ग्रामीणों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि खाद्य विभाग के अधिकारी इस मामले में जानबूझकर नरमी बरत रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि कोई गरीब व्यक्ति राशन दुकान में मामूली गड़बड़ी करता तो उसके खिलाफ तुरंत कार्रवाई हो जाती, लेकिन यहां 84 क्विंटल चावल गायब होने के बाद भी जिम्मेदार लोग खुलेआम घूम रहे हैं।

    इधर एक और बात लोगों को चौंका रही है। पुराने सेल्समैन को हटाने के बाद दुकान में सीएचसी ऑपरेटर आशीष साहू को नया विक्रेता बना दिया गया है। इस फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पहले यह बताया जाए कि पुराना स्टॉक कहां गया, 84 क्विंटल चावल किसके कब्जे में है, किसके आदेश पर उसे निकाला गया, और किस-किस की इसमें भूमिका है। उसके बाद ही नई नियुक्ति की जानी चाहिए थी।

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। दुकान के पिछले कई महीनों के स्टॉक रजिस्टर, वितरण रजिस्टर और परिवहन रिकॉर्ड की जांच हो। दुकान में लगे सीसीटीवी, यदि उपलब्ध हों, उनकी जांच की जाए। साथ ही यह भी देखा जाए कि मार्च महीने में जिन हितग्राहियों को राशन दिखाया गया, उन्हें वास्तव में पूरा राशन मिला भी था या नहीं।

    ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस मामले में सिर्फ सेल्समैन को बलि का बकरा बनाया गया और बाकी जिम्मेदार लोगों को बचा लिया गया, तो इससे पूरे राशन व्यवस्था पर सवाल खड़े होंगे। लोगों की मांग है कि दोषियों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए, खाद्य निरीक्षक और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो, और 84 क्विंटल चावल का हिसाब जनता के सामने रखा जाए।

    क्योंकि यह सिर्फ चावल का मामला नहीं है, यह उन गरीब परिवारों के हक का सवाल है, जिनके लिए सरकार हर महीने राशन भेजती है। अगर गरीबों का राशन ही रास्ते में गायब होने लगे और विभाग आंखें मूंद ले, तो फिर व्यवस्था पर भरोसा कैसे किया जाए?
    अब सबकी नजर प्रशासन पर है। क्या 84 क्विंटल चावल गमन मामले में सच सामने आएगा? क्या दोषियों पर कार्रवाई होगी? या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की चर्चा के बाद फाइलों में दब जाएगा?

    Hemant Baghel
    “The case of 84 quintals of PDS rice going missing in Siriadih is it a robbery of the rights of the poor or negligence of the system?”
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    Hemant Baghel

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