हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) लवन में संचालित 102 महतारी एक्सप्रेस सेवाओं को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि सरकारी एंबुलेंस के कुछ चालक मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर इलाज का झांसा देकर सरकारी एंबुलेंस के बजाय अपनी निजी एंबुलेंस से निजी अस्पतालों तक ले जा रहे हैं। इस पूरे मामले में सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार, सीएचसी लवन में 102 महतारी एक्सप्रेस के चालक रामकृपाल साहू पर आरोप है कि वे अस्पताल आने वाले मरीजों को सरकारी सुविधा का लाभ दिलाने के बजाय निजी एंबुलेंस का उपयोग करने के लिए प्रेरित करते हैं। आरोप यह भी है कि वाहन चालक के पास स्वयं की निजी एंबुलेंस भी है, जिससे मरीजों को जिला अस्पताल अथवा अन्य बड़े निजी अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है।
सरकारी योजना का उद्देश्य हो रहा प्रभावित
राज्य सरकार ने 102 महतारी एक्सप्रेस और 108 संजीवनी एक्सप्रेस जैसी सेवाएं गर्भवती महिलाओं, दुर्घटना पीड़ितों और गंभीर मरीजों को निःशुल्क एवं त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की हैं। इन सेवाओं का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों को समय पर अस्पताल तक पहुंचाना है।
लेकिन यदि सरकारी एंबुलेंस चालक ही मरीजों को निजी एंबुलेंस से ले जाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं, तो इससे सरकारी योजना के उद्देश्य पर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
कई वर्षों से चल रहे खेल का आरोप
सूत्रों का दावा है कि यह सिलसिला कोई नया नहीं, बल्कि कई वर्षों से जारी है। आरोप है कि जब सीएचसी लवन से किसी मरीज को जिला अस्पताल या अन्य उच्च स्वास्थ्य संस्थान के लिए रेफर किया जाता है, तब कई मामलों में सरकारी एंबुलेंस का उपयोग नहीं किया जाता। इसके बजाय मरीजों को निजी एंबुलेंस में ले जाया जाता है, जिससे उनसे मोटी रकम वसूली जाती है।
सूत्रों के अनुसार, संबंधित चालक की जिले के कुछ निजी अस्पतालों से भी सांठगांठ होने की चर्चा है। आरोप है कि मरीजों को “बेहतर इलाज” का हवाला देकर निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है और इसके एवज में कमीशन लिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बीएमओ की भूमिका पर भी उठे सवाल
मामले में यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि सरकारी एंबुलेंस चालक लंबे समय से इस प्रकार की गतिविधियों में संलिप्त हैं, तो क्या इसकी जानकारी अस्पताल प्रबंधन को नहीं थी? स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि बिना प्रशासनिक जानकारी के इस तरह की गतिविधियां लंबे समय तक चलना मुश्किल माना जा रहा है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
बीएमओ से नहीं हो सका संपर्क
इस संबंध में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लवन के बीएमओ डॉ. नवदीप बांधे का पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
जांच के बाद ही होगी सच्चाई स्पष्ट
फिलहाल यह मामला गंभीर आरोपों के आधार पर सामने आया है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के दुरुपयोग का बड़ा मामला साबित हो सकता है। वहीं यदि आरोप निराधार निकलते हैं तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। अब निगाहें स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि इस मामले में क्या कार्रवाई की जाती है।




