हेमंत बघेल
16 से 22 जुलाई तक मंगाए गए थे आवेदन, सितंबर में भी चयन सूची का इंतजार; त्रैमासिक परीक्षा सिर पर, जिम्मेदार अधिकारियों और प्राचार्यों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
बलौदाबाजार। जिले में संचालित डी.ए.व्ही. मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूलों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के बीपीएल श्रेणी के बच्चों के लिए आरक्षित निःशुल्क शासकीय कोटे की रिक्त सीटों पर प्रवेश प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला शिक्षा विभाग द्वारा जुलाई माह में द्वितीय चरण के तहत आवेदन मंगाए जाने के बावजूद अब तक चयन सूची जारी नहीं किए जाने से कई बच्चे स्कूल में प्रवेश के इंतजार में हैं।

जिला शिक्षा विभाग द्वारा जारी दस्तावेज के अनुसार, जिले में संचालित डी.ए.व्ही. मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल छरछेद (कसडोल), सकरी (बलौदाबाजार) और टिकुलिया (भाटापारा) में 08 प्रतिशत निःशुल्क शासकीय कोटे के तहत रिक्त सीटों पर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के बीपीएल श्रेणी के बच्चों से 16 जुलाई 2026 से 22 जुलाई 2026 तक आवेदन मंगाए गए थे।

आवेदन प्रक्रिया पूरी हुए लंबा समय बीत जाने के बाद भी चयन सूची सार्वजनिक नहीं होने से अभिभावकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। जिन बच्चों को सरकारी कोटे के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना था, वे प्रवेश सूची के इंतजार में स्कूल से वंचित हो रहे हैं। वहीं कुछ अभिभावक मजबूरी में अपने बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने की ओर रुख कर रहे हैं।
सरकारी दस्तावेज में रिक्त सीटों की पूरी जानकारी, फिर चयन सूची क्यों नहीं?
जिला शिक्षा विभाग द्वारा 15 जुलाई 2026 को जारी रिक्त सीटों की जानकारी के अनुसार तीनों स्कूलों में कई सीटें खाली थीं।
डी.ए.व्ही. मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल छरछेद (कसडोल) में एलकेजी की 7 स्वीकृत सीटों में 6 सीटें तथा तीसरी कक्षा में 1 सीट रिक्त बताई गई थी।
डी.ए.व्ही. मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल सकरी (बलौदाबाजार) में नर्सरी की 7 में से 5, एलकेजी की 7 में से 1 तथा कक्षा 8वीं की 7 में से 5 सीटें रिक्त थीं।
इसी तरह डी.ए.व्ही. मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल टिकुलिया (भाटापारा) में नर्सरी की 4, एलकेजी की 5, कक्षा चौथी की 1, छठवीं की 1, सातवीं की 1 और आठवीं की 1 सीट रिक्त बताई गई थी।
यानी विभाग के अपने दस्तावेज में रिक्त सीटों की जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज है। इसके बाद आवेदन भी निर्धारित समय में मंगाए गए। लेकिन अब सवाल यह है कि आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन सूची जारी करने में इतनी देरी क्यों हो रही है?

जुलाई में आवेदन, सितंबर में भी इंतजार
सरकार द्वारा आर्थिक रूप से कमजोर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से निःशुल्क शासकीय कोटे की व्यवस्था की गई है। ऐसे में यदि आवेदन लेने के बाद चयन सूची जारी करने में महीनों लग जाएं तो इस व्यवस्था का लाभ वास्तविक जरूरतमंद बच्चों तक समय पर कैसे पहुंचेगा?
अभिभावकों का कहना है कि शैक्षणिक सत्र लगातार आगे बढ़ रहा है। त्रैमासिक परीक्षा नजदीक है, लेकिन कई बच्चे अभी भी इस उम्मीद में हैं कि उनका नाम चयन सूची में आएगा और उन्हें डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूल में प्रवेश मिल सकेगा।
ऐसे में देरी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। यदि किसी बच्चे का चयन बाद में होता है तो वह पहले से चल रही कक्षाओं और पाठ्यक्रम से पीछे रह सकता है।
डीएवी स्कूलों के प्राचार्यों की भूमिका पर भी सवाल
इस पूरी प्रक्रिया में संबंधित डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूलों के प्राचार्यों की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जब जिला शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित समय सीमा में आवेदन मंगाए गए हैं, तो आवेदन प्राप्त होने के बाद उनकी जांच, पात्रता निर्धारण और चयन प्रक्रिया किस स्तर पर लंबित है?
क्या संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों द्वारा चयन प्रक्रिया से संबंधित जानकारी जिला स्तरीय समिति को समय पर उपलब्ध कराई गई?
क्या चयन सूची तैयार हो चुकी है? यदि तैयार है तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?
जिला शिक्षा अधिकारी से भी जवाबदेही की मांग
पूरी प्रक्रिया जिला शिक्षा विभाग की निगरानी में संचालित हो रही है। 15 जुलाई को सदस्य सचिव सह जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से आवेदन आमंत्रित करने संबंधी प्रेस विज्ञप्ति जारी हुई थी। ऐसे में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद चयन सूची जारी कराने की जिम्मेदारी भी जिला स्तरीय समिति एवं संबंधित अधिकारियों की बनती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने अब तक चयन सूची जारी करने के लिए क्या कार्रवाई की?
क्या विभाग ने संबंधित स्कूलों के प्राचार्यों से प्रगति रिपोर्ट मांगी?
यदि सूची जारी करने में देरी हुई है तो देरी का कारण क्या है?
और सबसे महत्वपूर्ण—जिन बच्चों के लिए सरकार ने निःशुल्क शिक्षा का अवसर सुनिश्चित किया है, उनके शैक्षणिक नुकसान की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा?
‘निःशुल्क शिक्षा’ का लाभ समय पर नहीं मिला तो योजना का उद्देश्य अधूरा
सरकार की योजनाओं का उद्देश्य तभी पूरा माना जा सकता है जब पात्र बच्चों को उसका लाभ समय पर मिले। महज आवेदन मंगाना और रिक्त सीटों की जानकारी जारी कर देना पर्याप्त नहीं है। प्रवेश प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करना भी उतना ही जरूरी है।
यदि जुलाई में आवेदन लेने के बाद सितंबर तक चयन सूची जारी नहीं होती है, तो यह प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
अभिभावकों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए तीनों डीएवी मुख्यमंत्री पब्लिक स्कूलों में लंबित प्रवेश प्रक्रिया की तत्काल समीक्षा करे और पात्र विद्यार्थियों की चयन सूची पारदर्शी तरीके से सार्वजनिक करे।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी और संबंधित स्कूलों के प्राचार्य इन सवालों का क्या जवाब देते हैं।
इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी के. एस. मरावी से संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। संबंधित अधिकारी का पक्ष प्राप्त होते ही उसे भी खबर में प्राथमिकता के साथ प्रकाशित किया जाएगा।










































