हेमंत बघेल
कसडोल। विकासखंड मुख्यालय स्थित पीएमश्री स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, कसडोल में नवप्रवेशी छात्र-छात्राओं से अतिरिक्त ₹450 शुल्क लिए जाने का मामला सामने आया है। पालकों ने आरोप लगाया है कि यह शुल्क शाला विकास एवं प्रबंधन समिति के वैध प्रस्ताव के बिना वसूला जा रहा है। मामले को लेकर विकासखंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपते हुए जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।

शासन के निर्धारित शुल्क से अलग वसूली का आरोप
पालकों का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार हाई स्कूल स्तर पर ₹410 तथा उच्चतर माध्यमिक स्तर पर ₹445 शुल्क का प्रावधान है। इसके बावजूद विद्यालय प्रबंधन द्वारा प्रवेश के समय छात्रों से अतिरिक्त ₹450 की मांग की जा रही है। आरोप है कि इसके लिए प्राचार्य की ओर से लिखित आदेश भी जारी किया गया है।

शुल्क का आधार पूछने पर नहीं मिला संतोषजनक जवाब
जानकारी के अनुसार, नए शैक्षणिक सत्र में प्रवेश लेने पहुंचे कई पालकों से फॉर्म और प्रवेश प्रक्रिया के नाम पर अतिरिक्त राशि ली गई। जब पालकों ने इस शुल्क का आधार और शाला विकास एवं प्रबंधन समिति के प्रस्ताव की जानकारी मांगी तो उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। इसके बाद पालकों ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत देकर मामले की जांच की मांग की।

समिति की स्वीकृति के बिना शुल्क लेना नियम विरुद्ध
शिकायत में कहा गया है कि शासकीय आत्मानंद विद्यालयों में किसी भी प्रकार का विकास शुल्क या अन्य राशि लेने से पहले शाला विकास एवं प्रबंधन समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है। समिति में पालकों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सहमति के बाद ही ऐसा निर्णय लिया जा सकता है। आरोप है कि विद्यालय में इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

पालकों ने जताई नाराजगी, राशि लौटाने की मांग
पालकों का कहना है कि सरकार आत्मानंद विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण और सुलभ शिक्षा देने का दावा करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर अतिरिक्त शुल्क लेकर अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाला जा रहा है। उन्होंने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय जांच कर वसूली गई राशि वापस कराई जाए तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
प्राचार्य ने क्या कहा
विद्यालय के प्राचार्य वी.आर. मंडलेश्वर ने बताया कि 23 अप्रैल 2026 को हुई शाला विकास समिति की बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया था। उनका कहना है कि इसके बाद समिति भंग हो गई। वहीं रसीद के संबंध में उन्होंने कहा कि नई रसीदें छपने के लिए भेजी गई हैं।
हालांकि शिकायतकर्ताओं का दावा है कि शाला विकास समिति अभी तक भंग नहीं हुई है। उनका कहना है कि 23 अप्रैल की बैठक के प्रस्ताव में स्पष्ट उल्लेख है कि शुल्क संबंधी विषय पर आगामी बैठक में चर्चा की जाएगी। आरोप है कि इसके बाद समिति की कोई बैठक नहीं हुई, जबकि नियमों के अनुसार हर तीन महीने में बैठक आयोजित किया जाना आवश्यक है।
इनका कहना है
अरविंद ध्रुव, विकासखंड शिक्षा अधिकारी, कसडोल
“पालकों की शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की जांच की जाएगी। समिति के प्रस्ताव का परीक्षण किया जाएगा। यदि अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।”
गणेश शंकर साहू, अध्यक्ष, शाला प्रबंधन विकास समिति
“विद्यालय में समिति के नाम पर अतिरिक्त ₹450 शुल्क लिया जाना पूरी तरह गलत है। हमारी किसी बैठक में ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं हुआ। मामले की शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बलौदाबाजार में भी कर जांच की मांग की गई है।”




