शिकायतकर्ता ने कहा– सिर्फ निलंबन नहीं, एफआईआर और बर्खास्तगी की भी हो कार्रवाई
हेमंत बघेल
कसडोल। कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय, कसडोल की पूर्व प्रभारी अधीक्षिका एवं सहायक शिक्षक (एल.बी.) रीना कट्टकवर को वित्तीय अनियमितता और शासकीय नियमों के उल्लंघन के आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। यह कार्रवाई संभागीय संयुक्त संचालक, शिक्षा संभाग रायपुर द्वारा जारी आदेश के तहत की गई है।

जारी आदेश के अनुसार, जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार-भाटापारा एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी कसडोल की जांच रिपोर्ट में पाया गया कि रीना कट्टकवर ने अपने कार्यकाल के दौरान समग्र शिक्षा के नियमों के विपरीत मानसेवी कर्मचारियों की नियुक्ति की तथा उनके नाम पर मानदेय के अतिरिक्त पीएफएमएस (PFMS) के माध्यम से कथित रूप से गलत भुगतान कराया। इसके अलावा वस्तु क्रय में भंडार क्रय नियमों का पालन नहीं किया गया तथा कई मामलों में टीडीएस और जीएसटी कटौती भी नहीं की गई।

आदेश में कहा गया है कि यह कृत्य आर्थिक अनियमितता एवं शासकीय कार्य के प्रति लापरवाही का परिचायक है, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 के नियम-3 का उल्लंघन है। इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के नियम-9(1) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, कसडोल निर्धारित किया गया है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
नगर के पूर्व पार्षद एवं सर्व नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश कन्नौजे ने 7 अप्रैल 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत कर वर्ष 2021 से 2026 के बीच छात्राओं के भोजन, छात्रवृत्ति, मजदूरी, प्रशिक्षण एवं अन्य मदों में प्राप्त शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग, फर्जी बिलों के माध्यम से भुगतान तथा पीएफएमएस के जरिए फर्जी ट्रांजेक्शन कर लाखों-करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता का आरोप लगाया था।
शिकायत के बाद जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा ने 28 अप्रैल 2026 को विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्त्रोत समन्वयक, कसडोल को संयुक्त जांच कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। जांच प्रतिवेदन उच्चाधिकारियों को सौंपे जाने के बाद यह निलंबन आदेश जारी किया गया।
शिकायतकर्ता ने कार्रवाई को बताया अधूरी
शिकायतकर्ता राजेश कन्नौजे ने कहा कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है। उनका आरोप है कि जांच में कई महत्वपूर्ण वित्तीय लेन-देन और कथित फर्जी भुगतान के मामलों को शामिल नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कई दुकानों के नाम पर फर्जी बिल बनाकर राशि अन्य खातों में ट्रांसफर की गई, लेकिन इन तथ्यों का समुचित परीक्षण नहीं हुआ।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हॉस्टल के कर्मचारी अनूप साहू की कथित रूप से वित्तीय लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके अनुसार, वर्ष 2022 से 2024 के बीच एक फैंसी एवं जनरल स्टोर्स के नाम पर सब्जी खरीद के लिए 10 लाख रुपये से अधिक का भुगतान किया गया। शिकायतकर्ता ने इस मामले में अनूप साहू के खिलाफ भी जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
एफआईआर और वसूली की मांग
राजेश कन्नौजे ने प्रशासन से मामले में एफआईआर दर्ज करने, कथित गबन की राशि की वसूली, दोषियों को सेवा से बर्खास्त करने तथा पूरे प्रकरण की विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की मांग दोहराई है।




