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    सिद्धखोल जलप्रपात बना वसूली का केंद्र? बिना लिखित आदेश पर्यटकों से शुल्क वसूलने के आरोप, वन विभाग पर उठे सवाल

    Hemant BaghelBy Hemant BaghelJuly 11, 202603 Mins Read
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    हेमंत बघेल 

    कसडोल/सोनाखान। वन परिक्षेत्र सोनाखान अंतर्गत स्थित प्रसिद्ध सिद्धखोल जलप्रपात इन दिनों प्राकृतिक सौंदर्य से अधिक कथित वसूली को लेकर चर्चा में है। आरोप है कि वन प्रबंधन समिति कुकरीकोना द्वारा वन विभाग के कर्मचारियों की मौजूदगी में पर्यटकों से विभिन्न मदों में शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि मौके पर मौजूद कर्मचारियों के पास इस संबंध में कोई लिखित आदेश उपलब्ध नहीं है।

    जानकारी के अनुसार, जलप्रपात पर आने वाले पर्यटकों से प्रति व्यक्ति 10 रुपये, खाना बनाने के लिए 50 रुपये, चारपहिया वाहन से 30 रुपये तथा दोपहिया वाहन से 20 रुपये स्वच्छता एवं रखरखाव के नाम पर लिए जा रहे हैं। हालांकि, जब नाके पर रसीद काट रहे कर्मचारियों और समिति के सदस्यों से इस वसूली के संबंध में लिखित आदेश की प्रति मांगी गई, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास कोई लिखित आदेश नहीं है। उनका कहना था कि “डीएफओ साहब निरीक्षण के दौरान मौखिक निर्देश देकर गए हैं।”

    यहीं से पूरे मामले पर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासनिक व्यवस्था में सामान्यतः किसी प्रकार का शुल्क वसूलने के लिए सक्षम अधिकारी का लिखित आदेश आवश्यक माना जाता है। ऐसे में केवल मौखिक निर्देश के आधार पर शुल्क वसूली कितनी वैध है, यह जांच का विषय है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्ष 2025 में भी वाहनों से सफाई के नाम पर राशि ली गई थी और इस वर्ष नए नियम जोड़कर प्रति व्यक्ति तथा खाना बनाने पर भी शुल्क लिया जा रहा है। आरोप है कि यह वसूली बिना स्पष्ट लिखित अनुमति के की जा रही है।

    वहीं, पर्यटकों का कहना है कि जिस स्वच्छता के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है, उसी सिद्धखोल परिसर में जगह-जगह प्लास्टिक कचरा और शराब की खाली बोतलें देखी जा सकती हैं। उनका आरोप है कि सफाई व्यवस्था अपेक्षित स्तर की नहीं है।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कुछ युवक करीब 40 फीट ऊंचे जलप्रपात से छलांग लगाते नजर आए, जबकि मौके पर तैनात वन विभाग के कर्मचारी उन्हें रोकने के बजाय नाके पर ही बैठे रहे। यदि किसी प्रकार की दुर्घटना होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह भी बड़ा प्रश्न है।

    https://reporter36.com/wp-content/uploads/2026/07/VID-20260711-WA0044.mp4

     

    महिला पर्यटकों ने भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि शुल्क तो लिया जा रहा है, लेकिन परिसर में महिलाओं के लिए शौचालय तक उपलब्ध नहीं है, जिससे उन्हें असुविधा और असुरक्षा महसूस होती है।

    आरोप यह भी है कि वन प्रबंधन समिति केवल बरसात के मौसम में ही शुल्क वसूली शुरू करती है, जबकि वर्षभर पर्यटक यहां आते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि उद्देश्य वास्तव में स्वच्छता और रखरखाव है तो यह व्यवस्था पूरे वर्ष क्यों नहीं दिखाई देती।

    इस पूरे मामले में वन परिक्षेत्र अधिकारी रामेश्वर नामदेव से शुल्क वसूली संबंधी लिखित आदेश की प्रति उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया था, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनके द्वारा कोई आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई थी।

    यदि विभाग के पास इस संबंध में वैध लिखित आदेश मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि पर्यटकों में किसी प्रकार का भ्रम न रहे। वहीं यदि बिना विधिवत अनुमति के शुल्क वसूला जा रहा है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए। और एक बड़ी बात की जिस फोन पे माध्यम से पैसे लिए जा रहे ओ व्यक्तिगत खाता है, समिति के खाते में पैसा न लेना सन्देहप्रद है।

    Hemant Baghel
    Has Siddhkhol Waterfall become a hub for unauthorized fee collection? Allegations of collecting charges from tourists without written orders raise questions about the Forest Department.
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    Hemant Baghel

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