हेमंत बघेल
कसडोल | स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय एक बार फिर कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर चर्चा में है। नगर के पूर्व पार्षद एवं सर्व नागरिक कल्याण समिति के अध्यक्ष राजेश कन्नौजे ने विद्यालय की पूर्व प्रभारी अधीक्षिका रीना कट्टकवर पर वर्ष 2021 से 2026 के दौरान छात्राओं के भोजन, छात्रवृत्ति, मजदूरी, प्रशिक्षण एवं अन्य मदों में प्राप्त शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग, फर्जी बिलों के जरिए भुगतान और PFMS प्रणाली के माध्यम से कथित फर्जी भुगतान कर लाखों-करोड़ों रुपये की वित्तीय अनियमितता करने का आरोप लगाया है।

शिकायतकर्ता ने कलेक्टर जनदर्शन सहित संबंधित अधिकारियों को दो अलग-अलग शिकायतें सौंपते हुए मामले में एफआईआर दर्ज करने, शासकीय राशि की वसूली, दोषियों को बर्खास्त करने तथा विशेष जांच दल गठित कर जांच कराने की मांग की है।

दो बार शिकायत, दो बार जांच के आदेश
राजेश कन्नौजे ने पहली शिकायत 7 अप्रैल 2026 को कलेक्टर जनदर्शन में प्रस्तुत की थी, जिसमें 11 बिंदुओं पर विस्तृत आरोप लगाए गए थे। इसके बाद जिला मिशन समन्वयक, समग्र शिक्षा, बलौदाबाजार-भाटापारा ने 28 अप्रैल 2026 को पत्र क्रमांक 83 जारी कर विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं विकासखंड स्त्रोत समन्वयक, कसडोल को सात दिनों के भीतर संयुक्त जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
इसके बाद 19 मई 2026 को दूसरी विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की गई, जिसमें 12 बिंदुओं पर कथित आर्थिक अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए एफआईआर दर्ज करने और तत्काल बर्खास्तगी की मांग की गई। इस शिकायत पर भी जिला मिशन समन्वयक ने 27 मई 2026 को पत्र क्रमांक 140 जारी कर सात दिवस के भीतर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
शिकायत में लगाए गए प्रमुख आरोप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि पूर्व अधीक्षिका द्वारा—
PFMS के माध्यम से विभिन्न फल एवं सब्जी विक्रेताओं के नाम पर कथित फर्जी भुगतान कराया गया।
जिन दुकानों का अस्तित्व नहीं है, उनके नाम पर भुगतान दर्शाया गया।
भोजन मद की राशि निजी एवं अन्य व्यक्तियों के खातों में स्थानांतरित की गई।

मजदूरी, चौकीदार, कराटे प्रशिक्षण, सेल्फ डिफेंस, ट्यूशन शिक्षक, कंप्यूटर शिक्षक तथा अतिथि शिक्षक सहित विभिन्न मदों में एक ही व्यक्ति को अलग-अलग पदों पर भुगतान किया गया।
देव किराना स्टोर सहित अन्य विक्रेताओं के नाम पर सामग्री खरीदी में कथित अनियमितता की गई।

डिलीवरी अवकाश पर रहने वाली अतिथि शिक्षिका को नियमित वेतन भुगतान किया गया।

छात्रावास में नियमों के विरुद्ध कॉलेज की छात्राओं को रखा गया।
एफआईआर और वसूली की मांग
राजेश कन्नौजे का कहना है कि छात्राओं के भोजन, शिक्षा और अन्य सुविधाओं के लिए शासन द्वारा उपलब्ध कराई गई राशि का कथित दुरुपयोग किया गया है। उन्होंने पूरे मामले की विशेष जांच, शासकीय राशि की वसूली, एफआईआर दर्ज करने और दोषियों के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की है।
जांच लंबित, कार्रवाई का इंतजार
दो-दो बार जांच के आदेश जारी होने के बावजूद अब तक सार्वजनिक रूप से जांच प्रतिवेदन या किसी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आने से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतकर्ता ने चेतावनी दी है कि यदि समय पर कार्रवाई नहीं हुई तो सर्व नागरिक कल्याण समिति एवं महिला संगठनों के साथ धरना-प्रदर्शन और घेराव किया जाएगा।
जांच अधिकारी का पक्ष
इस मामले में जांच अधिकारी एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी अरविन्द ध्रुव ने बताया कि “जांच अभी पूरी नहीं हुई है, जांच जारी है।”
पूर्व अधीक्षिका का पक्ष
मामले में पूर्व प्रभारी अधीक्षिका रीना कट्टकवर से उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क किया गया। उन्होंने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए फोन काट दिया।
निष्पक्षता के लिए महत्वपूर्ण
फिलहाल शिकायतों में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन द्वारा जांच के आदेश दिए जा चुके हैं और जांच प्रक्रिया जारी है। मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच प्रतिवेदन एवं प्रशासन की आगे की कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।




