11 साल बाद दोबारा डी.एड. करने पर गहराया संदेह, जांच में सामने आई गंभीर गड़बड़ी
हेमंत बघेल
बलौदाबाजार। फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेज के आधार पर नौकरी हासिल करने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर कुलदीप शर्मा के निर्देश पर कसडोल विकासखंड के शासकीय प्राथमिक शाला कंजिया में पदस्थ सहायक शिक्षक (एल.बी.) रामेश्वर प्रसाद साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
जानकारी के अनुसार पिसीद (कसडोल) निवासी हेमदास मानिकपुरी ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत करते हुए आरोप लगाया था कि रामेश्वर प्रसाद साहू ने वर्ष 2011 में फर्जी डी.एड. अंकसूची प्रस्तुत कर शिक्षाकर्मी वर्ग-03 के पद पर नियुक्ति प्राप्त की थी। शिकायत में बताया गया कि नियुक्ति के करीब 11 वर्ष बाद शिक्षक ने पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय बिलासपुर से दोबारा डी.एड. किया, जिससे वर्ष 2011 में प्रस्तुत प्रमाण पत्र की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हुए।
जांच में सामने आई बड़ी गड़बड़ी
कलेक्टर के निर्देश पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत कसडोल और विकासखंड शिक्षा अधिकारी कसडोल द्वारा मामले की जांच की गई। जांच के दौरान शिक्षक द्वारा 4 जनवरी 2011 को कार्यभार ग्रहण करते समय लगाए गए डी.एड. प्रमाण पत्र की सील में ‘जिला बलौदाबाजार’ अंकित पाया गया।
जांच अधिकारियों के अनुसार उस समय बलौदाबाजार जिला अस्तित्व में ही नहीं था, क्योंकि बलौदाबाजार जिले का गठन वर्ष 2012 में हुआ था। वहीं एक अन्य प्रतिवेदन में ‘जिला रायपुर’ की सील अंकित पाई गई। इन तथ्यों के आधार पर दस्तावेजों की सत्यता को लेकर गंभीर अनियमितता सामने आई।
विभागीय जांच भी होगी
जांच प्रतिवेदन के आधार पर शिक्षक के कृत्य को छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के विपरीत पाया गया। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9 के तहत रामेश्वर प्रसाद साहू को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी, पलारी निर्धारित किया गया है। नियमानुसार उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा। वहीं मामले में पृथक से विभागीय जांच भी संस्थित की जा रही है।









































