विजय साहू
बलौदाबाजार। जिले के कसडोल जनपद पंचायत क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत गोलासर के आश्रित ग्राम देवकछार/देवकस में प्रधानमंत्री आवास को लेकर सामने आए विवाद में अब नया मोड़ सामने आया है।

आवेदिका हेमकुमारी चौहान द्वारा कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक के समक्ष शिकायत कर सरपंच पति जगमोहन नायक सहित अन्य ग्रामीणों पर प्रधानमंत्री आवास को जेसीबी से तोड़ने और मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं सरपंच पति और ग्रामवासियों ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए जमीन के सार्वजनिक उपयोग और ग्रामसभा में लिए गए निर्णय का हवाला दिया है।

ग्रामवासियों का दावा—जमीन को लेकर पहले से था विवाद
ग्रामवासियों द्वारा थाना राजादेवरी में दिए गए आवेदन के अनुसार, गांव के स्वागत गेट के पास स्थित जमीन का उपयोग पूर्व में निस्तार के लिए किया जाता था। आवेदन में बताया गया है कि जमीन को लेकर उमेश चौहान की ओर से कब्जे की स्थिति बनने के बाद ग्रामवासियों ने बैठक कर विवाद का समाधान निकालने का प्रयास किया।

ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित स्थान पर पंचायत का चावल गोदाम और खाद गोदाम संचालित किया जा रहा था तथा जगह कम पड़ने के कारण ग्रामवासियों की सहमति से वहां सार्वजनिक उपयोग के लिए सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान विवाद की स्थिति बनी।
थाना राजादेवरी में दिए गए ग्रामवासियों के आवेदन में मारपीट के आरोपों को भी अलग तरीके से बताया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर कहासुनी और झूमाझटकी हुई, लेकिन किसी को चोट नहीं आई।
ग्रामसभा में हुआ था प्रस्ताव
मामले में ग्रामसभा के एक प्रस्ताव का भी हवाला दिया जा रहा है। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार 19 मई 2025 को ग्रामसभा में जमीन के उपयोग को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया था। प्रस्ताव में संबंधित जमीन को ग्रामवासियों के उपयोग में रखने तथा सार्वजनिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखने की बात दर्ज होने का दावा किया गया है।

वहीं ग्राम कोटवार परमेश्वर चौहान के प्रतिवेदन में बताया गया है कि हेमकुमारी चौहान के मकान की चाबी उन्हें दी गई थी, जिसे उन्होंने ग्रामवासियों को सौंप दिया था। प्रतिवेदन के अनुसार उक्त मकान का उपयोग खाद एवं चावल गोदाम के रूप में किया जा रहा था तथा सार्वजनिक सुविधा के लिए भवन निर्माण के उद्देश्य से मकान को हटाने का निर्णय लिया गया।
सरपंच पति ने आरोपों को बताया झूठा
सरपंच पति जगमोहन नायक ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार बताया है। उनका कहना है कि संबंधित जमीन को लेकर ग्राम में पहले से विवाद था और मामले में ग्रामसभा एवं ग्रामीणों की मौजूदगी में निर्णय लिया गया था।
उनका दावा है कि शिकायतकर्ता द्वारा जिस स्थान पर प्रधानमंत्री आवास बनाए जाने की बात कही जा रही है, वह भूमि निजी पट्टे की भूमि न होकर शासकीय/सार्वजनिक उपयोग की जमीन से संबंधित है। इसी आधार पर उनका कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर किए गए निर्माण की वास्तविक स्थिति और जमीन के स्वामित्व की जांच प्रशासन द्वारा कराई जानी चाहिए।
दस्तावेजों से निर्माण स्थल को लेकर भी उठे सवाल
मामले में रोजगार सहायक द्वारा दिए गए प्रतिवेदन में हेमकुमारी चौहान के आवास के स्थल निरीक्षण का उल्लेख है। प्रतिवेदन के अनुसार आवास का स्थल गांव की पुरानी बस्ती में स्थित पुराने मकान वाली जगह पर बताया गया है।
इसके अलावा खाद के अग्रिम भंडारण के कारण समिति के गोदाम की क्षमता पूर्ण होने और अतिरिक्त गोदाम व्यवस्था की आवश्यकता को लेकर ग्राम पंचायत को दिए गए आवेदन का भी उल्लेख सामने आया है। इससे ग्रामीण पक्ष का कहना है कि संबंधित स्थान के सार्वजनिक उपयोग और गोदाम व्यवस्था को लेकर गांव में पहले से गतिविधियां चल रही थीं।
अब जांच से ही साफ होगी वास्तविक स्थिति
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवास, जमीन के स्वामित्व, निर्माण की स्वीकृति, ग्रामसभा के निर्णय तथा मकान तोड़े जाने की परिस्थितियों को लेकर दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे हैं। आवेदिका ने जहां इसे अपने निजी पट्टे की भूमि पर बना प्रधानमंत्री आवास बताते हुए जबरन तोड़े जाने का आरोप लगाया है,
वहीं सरपंच पति और ग्रामवासियों का कहना है कि विवादित भूमि सार्वजनिक उपयोग की थी और कार्रवाई ग्रामसभा के निर्णय के आधार पर की गई। मामले में अब प्रशासनिक एवं पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित भूमि की वास्तविक प्रकृति क्या है, प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति किन दस्तावेजों के आधार पर हुई थी तथा निर्माण हटाने की कार्रवाई किसके आदेश अथवा निर्णय के आधार पर की गई।
फिलहाल मामला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक के समक्ष*शिकायत पहुंच चुका है। ऐसे में दोनों पक्षों के दस्तावेजों और ग्रामसभा के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरे विवाद की वास्तविक तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।










































